संस्कृत विश्वविद्यालय के खेल मैदान में शास्त्रार्थ के पुरोधाओं ने लगाए चौके-छक्के, संस्कृत में हुई कमेंट्री  

कंदुक प्रक्षेपक: कन्दुकं प्रक्षिपति तदा फलक ताडकत्वेन तीव्रगत्या प्रहरति, कन्दुकं आकाश मार्गेण गच्छन्,सीमा रेखात: बहिर्गतम् षड धावनाकेंन कोष: उद्घाटितवान् ।  (बालर ने बाल फेका बल्लेबाज ने काफी तेज प्रहार किया बाल आकाश मार्ग जाते हुए सीमा रेखा से बाहर चली गयी छ: रन से खाता खुला ) । 
 

संवाददाता : राजेश अग्रहरि 

वाराणसी। कंदुक प्रक्षेपक: कन्दुकं प्रक्षिपति तदा फलक ताडकत्वेन तीव्रगत्या प्रहरति, कन्दुकं आकाश मार्गेण गच्छन्,सीमा रेखात: बहिर्गतम् षड धावनाकेंन कोष: उद्घाटितवान् ।  (बालर ने बाल फेका बल्लेबाज ने काफी तेज प्रहार किया बाल आकाश मार्ग जाते हुए सीमा रेखा से बाहर चली गयी छ: रन से खाता खुला ) । 

जी हाँ ये कुछ और नहीं क्रिकेट मैच की कमेंट्री है वो भी संस्कृत भाषा में जिसमें सारे नियम किसी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच से कम नहीं है। बस अंतर इतना है कि यहाँ क्रिकेट की वेशभूषा व भाषा देवनागरी है। गुरुवार को सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान पर एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। 

संस्कृत संवर्धन के लिए समर्पित दशाश्वमेध स्थित श्री शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 77वें स्थापनोत्सव पर आयोजित यह अद्भुत व अनूठी संस्कृत क्रिकेट प्रतियोगिता का जिसमें सभी बटुक खिलाड़ी अपने परंपरिक गणवेश धोती व कुर्ता में टीका-त्रिपुण्ड लगाकर मैदान पर क्रिकेट खेलने उतरे। सभी खिलाड़ियों में मैच जीतने का काफी जोश था। 

मैच का उद्घाटन शास्त्रार्थ महाविद्यालय के प्राचार्य व संयोजक डा.गणेश दत्त शास्त्री ने बटुक खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया। इस अवसर पर क्रिकेट प्रतियोगिता के संयोजक शास्त्रार्थ महाविद्यालय के राष्ट्रपति पुरस्कृत प्राचार्य डा.गणेश दत्त शास्त्री ने कहा कि प्रतिवर्ष स्थापनोत्सव पर यह प्रतियोगिता छात्रों के उत्साहवर्धनार्थ किया जाता है। आचार्य विकास दीक्षित व डा.राघवशरण मिश्र ने भी बीच-बीच में संस्कृत में कमेंट्री की। कुछ क्षण अंग्रेजी में कमेंट्री डा.अशोक पांडेय ने की। 

जिन हाथों में सदैव वेद व संस्कृत ग्रंथ देखने को मिलता है उन्हीं कर-कमलों में आज बैट व बाल देखा गया। मैदान में उपस्थित दर्शकों में भी इस मैच को पूरा देखने के लिए काफी उत्साह था क्योंकि एसा स्वरूप प्रायः कहीं देखने को नहीं मिलता है। स्वरूप ऐसा कि जैसे चाणक्य के भेष में क्रिकेटर। इन सबसे इतर मैच का सबसे रोमांचक पहलू कमेंट्री का दिखा जो पूर्ण रूप से संस्कृत भाषा में हो रही थी। मुख्य कमेंटेटर शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 65 वर्षीय वयोवृद्ध वरिष्ठ आचार्य डा.शेषनारायण मिश्र थे जो धाराप्रावाह में संस्कृत में कमेंट्री कर रहे थे। उन्हें देखकर लगता था कि खेल मैदान में शास्त्रार्थ चल रहा हो। 

लंबी चुटियाधारी संस्कृत के बटुक मैदान में भी आपस में संस्कृत में ही बात करते थे इस मैच में अम्पायरिंग करने वाले पूर्व खिलाड़ी धीरज मिश्र व अनुज तिवारी भी भगवा धोती,दुपट्टा व रुद्राक्ष की माला धारण किए हुए थे। मैच के दौरान बटुक खिलाड़ियों ने कोरोना से बचाव के लिए दो गज दूरी मास्क है जरूरी का नारा भी लगाते रहे। संस्कृतमय कमेंट्री गुरुवार को पूरे दिन सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के मैदान पर गूंजेगी।  
 

शास्त्रार्थ महाविद्यालय के 77वें स्थापना दिवस पर आयोजित यह अंतर संस्कृत महाविद्यालयीय प्रतियोगिता थी, जिसमें जनपद के चार टीमों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर प्रो.हरि प्रसाद अधिकारी, डा.माधुरी पांडेय, डा.उमाशंकर त्रिपाठी, आचार्य चूड़ामणि शास्त्री, डा.अशोक पांडेय, आमोद दत्त शास्त्री, श्रीराम पांडेय, बृजेश शुक्ला, शुभम शर्मा ,क्रीड़ाधिकारी लालजी मिश्रा आदि उपस्थित थे। पूरे मैच का संयोजन व सफल संचालन महाविद्यालय के साहित्य विभागाध्यक्ष आचार्य पवन शुक्ला ने किया ।