शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण है: डॉ पण्ड्या
हरिद्वार, 03 सितंबर (हि.स.)। देव संस्कृति विश्वविद्यालय में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के उन्नयन एवं व्यक्तित्व विकास के लिए विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ।
इस अवसर पर विवि के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ दिशा देना है। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ संस्कार, संस्कृति, सेवा और जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देव संस्कृति विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रहा है। यहां से निकलने वाला प्रत्येक विद्यार्थी ज्ञानवान होने के साथ संवेदनशील, अनुशासित और जिम्मेदार नागरिक बने, यही विश्वविद्यालय की मूल भावना है। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने, निरंतर सीखने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में गायत्री विद्यापीठ व्यवस्था मण्डल प्रमुख श्रीमती शेफाली पण्ड्या ने कहा कि विद्यार्थियों को यहां मिलने वाले अवसरों का सदुपयोग करते हुए अपने व्यक्तित्व को निखारना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक परंपराओं, अनुशासन, संस्कारमय जीवन एवं विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से परिचित कराया गया। इस अवसर पर विवि के कुलसचिव बलदाउ देवांगन सहित संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष एवं समस्त शिक्षक एवं विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला