शिकायतों ने खोली सरकारी व्यवस्था की पोल, कहीं सड़क बदहाल तो कहीं भालू का खतरा

 


पौड़ी गढ़वाल, 31 अगस्त (हि.स.)। जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित जनता दर्शन में सोमवार को पहुंची 28 शिकायतों ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। सबसे गंभीर बात यह रही कि कुछ समस्याएं एक-दो दिन या महीने पुरानी नहीं, बल्कि वर्षों से लंबित हैं।

सतपुली-पैडुल मोटर मार्ग पर सड़क कटिंग का मुआवजा दस साल से अधिक समय से अटका है तो बल्ली गांव के लोग अब भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। कहीं गांव के रास्ते झाड़ियों से पटे हैं तो कहीं भालू की आवाजाही से ग्रामीणों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हैं।

जनता दर्शन में आयुक्त गढ़वाल आनंद स्वरूप ने अधिकारियों को शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए। बल्ली गांव की पेयजल समस्या पर दो दिन में पाइपलाइन ठीक कराने और तब तक टैंकर से पानी उपलब्ध कराने को कहा गया।

भिताईं मल्ली में रास्ते पर झाड़ियों की शिकायत पर मौके पर बुशकटर उपलब्ध करा दिया गया। यह त्वरित कार्रवाई जरूर है, लेकिन इससे यह सवाल भी उठता है कि ग्रामीणों को सामान्य आवागमन की सुविधा के लिए जनता दर्शन तक क्यों पहुंचना पड़ा।

सतपुली-पैडुल मोटर मार्ग पर सड़क कटिंग का मुआवजा दस साल से अधिक समय से लंबित है। अब आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता से मामला निपटाने के निर्देश दिए हैं। इतने लंबे समय तक एक मामले के लंबित रहने से राजस्व, लोक निर्माण और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

तहसील मार्ग के गड्ढे, निराश्रित पशु, खराब स्ट्रीट लाइटें, पेयजल पाइपलाइन, मंदिर की क्षतिग्रस्त दीवार और आवासीय भवनों पर खतरा जैसी शिकायतें बताती हैं कि रोजमर्रा की मूलभूत समस्याओं पर विभागीय निगरानी कितनी कमजोर है।

ग्राम कठूड़ में घरों के आसपास भालू की आवाजाही की शिकायत के बाद एक सप्ताह में सोलर लाइट लगाने के निर्देश दिए गए। सवाल यह भी है कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम शिकायत आने के बाद ही क्यों किए जाते हैं।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की समीक्षा के दौरान आयुक्त ने खुद अधिकारियों को याद दिलाया कि शिकायत का निस्तारण केवल कागजों में नहीं होना चाहिए। शिकायतकर्ता से फोन पर फीडबैक लेने के निर्देश इसी बात की ओर इशारा करते हैं कि फाइल में निस्तारित दिख रही शिकायत और जमीन पर हल हुई समस्या के बीच अंतर को खत्म करना अभी भी बड़ी चुनौती है।

जनता दर्शन में आई शिकायतों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि यदि आमजन को छोटी-बड़ी समस्याओं के लिए बार-बार जनता दर्शन का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है, तो विभागीय स्तर पर नियमित जनसुनवाई और निगरानी कितनी प्रभावी है।

हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह