विद्यार्थियों में करें वैज्ञानिक सोच, नवाचार और समस्याओं के समाधान की क्षमता का विकास
नई टिहरी, 12 अगस्त (हि.स.)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) नई टिहरी में आयोजित इंस्पायरिंग इंडिया इन रिसर्च, इनोवेशन एंड एसटीईएम एजुकेशन (आईआरआईएसई) कार्यशाला में विशेषज्ञाें ने प्रतिभागी शिक्षकों से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और समस्याओं के समाधान की क्षमता को विकसित करने की अपील की। कहा कि पारंपरिक पढ़ाई के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढावा दें।
डायट में बुधवार को कार्यशाला के दूसरे दिन प्राचार्य दीपक रतूड़ी ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाए विद्यार्थियों में नवाचार, जिज्ञासा, रचनात्मकता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना जरूरी है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मनवीर नेगी ने प्रतिभागियों को आईआरआईएसई कार्यक्रम की रूपरेखा बताई। कहा आईआरआईएसई कार्यक्रम का संचालन आईआईएसईआर पुणे करता है।
इस कार्यक्रम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, टाटा ट्रस्ट, टाटा टेक्नोलॉजीज, ब्रिटिश काउंसिल सहित रॉयल सोसायटी ऑफ केमिस्ट्री जैसी प्रतिष्ठित संस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं। प्रतिभागियों को गणितीय संबंध, हमारे आस-पास रसायन विज्ञान, पारिस्थितिकी तंत्र और चिंतन सत्र, चुंबकत्व और विद्युत-चुंबकत्व, भोजन, ऊंचाई और दूरी सहित पृथक्करण की तकनीक का प्रशिक्षण दिया गया। इस मौके पर संदर्भदाता अक्षय कुलकर्णी, विनोद बडोनी, हेमवती गुसाईं, देवेंद्र भंडारी, विनोद पेटवाल, संजीव भट्ट, सरिता असवाल मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी