विकसित भारत के लिए डिजिटलीकरण की भूमिका विषय पर व्याख्यान
हरिद्वार, 03 अप्रैल (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के मैकेनिकल अभियांत्रिकी विभाग के सभागार में “विकसित भारत के लिए डिजिटलीकरण की भूमिका” विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को डिजिटल युग की आवश्यकताओं से अवगत कराना तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना था।
कार्यक्रम में एआईसीटीई के समन्वयक डॉ. बुद्ध चंद्रशेखर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीकी विकास के बीच संबंध को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारत के विद्यार्थियों की मानसिक शक्ति हजारों वर्षों की सांस्कृतिक और वैचारिक परंपरा से विकसित हुई है, जो उन्हें वैश्विक स्तर पर विशिष्ट बनाती है।
डॉ. चंद्रशेखर ने कहा कि भारतीय वेदों पर आज भी विश्व के विभिन्न देशों में शोध कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि जर्मनी जैसे देशों में वेदों का अध्ययन कराया जा रहा है तथा संस्कृत भाषा को विशेष महत्व दिया जा रहा है, जो भारतीय ज्ञान प्रणाली की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा ने कहा कि डिजिटलीकरण वर्तमान समय की अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीकों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे नई तकनीकों को अपनाकर भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अपना योगदान दें।
अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. मयंक अग्रवाल ने तकनीकी शिक्षा के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग तथा इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने पर भी बल दिया, ताकि विद्यार्थी रोजगार के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें। कार्यक्रम के अंत में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विपुल शर्मा ने मुख्य वक्ता सहित सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं, क्योंकि इससे उन्हें अपने करियर की दिशा निर्धारित करने में सहायता मिलती है।
इस अवसर पर डॉ. एम.एम. तिवारी, डॉ. संजीव लाम्बा, गजेंद्र सिंह, प्रवीण पांडेय, डॉ. अमन त्यागी, मयंक पोखरियाल, नमित खंडूजा, सहायक कुलसचिव डॉ. पंकज कौशिक, डॉ. निशांत, डॉ. धर्मेंद्र बालियान, दीपक वर्मा, उमाशंकर सहित अनेक शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रशांत कौशिक ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला