रामगढ़ महाविद्यालय में गढ़भोज दिवस पर सजी पारंपरिक व्यंजनों की प्रदर्शनी
नैनीताल, 07 अक्टूबर (हि.स.)। नैनीताल जनपद के राजकीय महाविद्यालय रामगढ़ में बुधवार को गढ़भोज दिवस धूमधाम से मनाया गया। प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. नगेंद्र द्विवेदी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने उत्तराखंड के पारंपरिक स्थानीय व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई व पोषण तत्वों की जानकारी दी।
प्रदर्शनी में भट्ट की चुड़कानी, मंडुवे की रोटी, पहाड़ी ककड़ी का रायता, भांग की चटनी, पोदीने की चटनी, कढ़ी-चावल, पकौड़े और आलू के गुटके सहित विभिन्न स्थानीय व्यंजन शामिल रहे। विद्यार्थियों ने स्थानीय अनाज और पारंपरिक भोजन के पोषण महत्व को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया।
प्राचार्य डॉ. नगेंद्र द्विवेदी ने गढ़भोज दिवस की शुभकामनाएं देते हुए पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों के महत्व पर प्रकाश डाला और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन डॉ. निर्मला रावत ने किया। इस अवसर पर नीमा पंत, तनुजा जोशी, दीप्ति, कुंदन, गणेश, कमलेश डोभाल और प्रेम भारती उपस्थित रहे।
गढ़भोज दिवस का उद्देश्य स्थानीय भोजन और कृषि को बढ़ावा देना
बताया गया है कि गढ़भोज दिवस का उद्देश्य उत्तराखंड की पारंपरिक फसलों, स्थानीय अनाज और पहाड़ी भोजन को पहचान दिलाने के साथ इनके पोषण-मूल्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और स्थानीय कृषि को प्रोत्साहित करना है। इस अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों और सरकारी संस्थानों में मंडुवा, झंगोरा, चौलाई, गहत, भट्ट, राजमा, लाल चावल और राई जैसे स्थानीय उत्पादों से बने व्यंजनों की प्रदर्शनी एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
गढ़भोज अभियान की शुरुआत वर्ष 2000 में द्वारिका प्रसाद सेमवाल के नेतृत्व में हुई थी। इसका उद्देश्य उत्तराखंड के पारंपरिक भोजन को पहचान दिलाने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ना था। बाद में 7 अक्टूबर को गढ़भोज दिवस के रूप में मनाने की परंपरा विकसित हुई। 2024 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी 7 अक्टूबर को प्रदेशभर में गढ़भोज दिवस मनाने का आह्वान किया था।
गढ़भोज अभियान को उत्तराखंड राज्य आंदोलन के चर्चित नारे “कोदा, झंगोरा खाएंगे, उत्तराखंड बनाएंगे” से भी जोड़ा जाता है। इसके माध्यम से स्थानीय अन्न और खाद्य संस्कृति को पहाड़ की पहचान तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था के आधार के रूप में स्थापित करने की भावना सामने आती है।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी