मानसून से पहले सभी विभाग तैयारियां पूरी करें, लापरवाही बर्दाश्त नहीं: एडीएम
हरिद्वार, 09 मई (हि.स.)। मानसून सत्र से पूर्व आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव गुप्ता ने जिला आपदा प्रबंधन सभागार में गूगल मीट के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग हरिद्वार एवं रुड़की, लघु सिंचाई, ग्रामीण निर्माण विभाग, पेयजल निगम, सभी विकासखंडों के विभागाध्यक्ष, नोडल अधिकारी एवं आपदा प्रबंधन अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में अपर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि विगत वर्ष आपदा न्यूनीकरण, नॉन एसडीआरएफ एवं अनटाइड फंड के तहत जो प्रस्ताव अपरिहार्य कारणों से स्वीकृत नहीं हो पाए थे, उनका पुनः परीक्षण कर वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार अपडेट करते हुए एक सप्ताह के भीतर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्रस्तावों एवं आगणनों को टुकड़ों में विभाजित न किया जाए तथा शासन की गाइडलाइन के अनुरूप ही प्रस्ताव भेजे जाएं, ताकि मानसून से पहले सभी आवश्यक कार्य समय पर पूरे हो सकें।
अपर जिलाधिकारी ने सभी स्थानीय निकायों, नगर निगम हरिद्वार एवं रुड़की, विकासखंडों तथा लोक निर्माण विभाग को निर्देशित किया कि उनके क्षेत्र के सभी छोटे-बड़े नालों, कलवर्टों एवं जल निकासी मार्गों की 30 मई तक पूर्ण सफाई सुनिश्चित की जाए और इसका प्रमाण पत्र आपदा प्रबंधन कार्यालय को उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कंट्रोल रूम के माध्यम से संवेदनशील जलभराव स्थलों, पंपसेट और अन्य संसाधनों का विवरण भी प्रस्तुत करने को कहा।
उन्होंने आपदा की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी उपलब्ध उपकरणों एवं संसाधनों का परीक्षण, मरम्मत और आवश्यक खोज एवं बचाव सामग्री की व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही नगर निगम हरिद्वार और रुड़की में कंट्रोल रूम सक्रिय करने तथा जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया।
बैठक में संबंधित विभागों को नालों की सफाई की दैनिक रिपोर्ट प्रतिदिन सायं 4 बजे तक आपदा प्रबंधन कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त वर्तमान आंधी-तूफान की स्थिति को देखते हुए सड़क मार्गों और आवासीय बस्तियों के आसपास खड़े जर्जर पेड़ों को हटाने तथा वृक्षों की लॉपिंग समयबद्ध तरीके से करने के आदेश भी जारी किए गए।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला