भारत-चीन सीमा पर तैनात जवानों को अब हर मौसम में मिलेगा भरपूर पानी

 

उत्तरकाशी, 20 सितंबर (हि.स.)। भारत-चीन सीमा पर तैनात जवानों को अब सर्दियों में पानी के लिए प्राकृतिक स्रोतों के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा। नेलांग घाटी में जल संस्थान भूजल स्रोत विकसित कर रहा है। इसके लिए नौ स्थानों पर बोरिंग का काम चल रहा है। इनमें सात स्थानों पर बोरिंग पूरी हो चुकी है। दो स्थानों पर काम जारी है।

परियोजना पूरी होने के बाद जवानों को हर मौसम में पेयजल उपलब्ध कराने की कोशिश है।

उत्तरकाशी के सीमावर्ती क्षेत्र में मौसम तेजी से बदलता है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के साथ तापमान काफी नीचे चला जाता है। इससे गदेरे और प्राकृतिक जलस्रोत जम जाते हैं। ऐसे में सीमा पर तैनात जवानों के सामने पानी की समस्या खड़ी हो जाती है। फिलहाल जवान अस्थायी तौर पर गदेरों और प्राकृतिक स्रोतों पर निर्भर रहते हैं।

इस समस्या को देखते हुए जल संस्थान ने नेलांग घाटी में भूजल स्रोत विकसित करने की योजना शुरू की है।

विभाग नौ स्थानों पर 200 से 300 फीट तक बोरिंग कर रहा है। सात स्थानों पर बोरिंग पूरी हो चुकी है। विभाग के अनुसार, बोरिंग के बाद पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद है। एक भूजल स्रोत तैयार करने में औसतन 85 लाख से एक करोड़ रुपये तक खर्च आ रहा है।

बोरिंग का काम पूरा होने के बाद पंप और टैंक का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा अन्य सिविल कार्य भी होंगे। परियोजना पूरी होने पर सीमा क्षेत्र में जवानों को पानी की उपलब्धता आसान होगी।

चीन सीमा से लगे प्रदेश के तीन जिलों में उत्तरकाशी पहला जिला होगा, जहां जवानों के लिए भूजल स्रोत विकसित किया जा रहा है।

इन नौ स्थानों पर बन रहे भूजल स्रोत

सोनम, नीलापानी, पीडीए, मेंडी, नागा, कोपांग, जादूंग, नेलांग और सुमला।

एलसी रमोला, ईई, जल संस्थान ने बताया कि नेलांग घाटी में तैनात जवानों के लिए भूजल स्रोत का कार्य जारी है। अब तक सात स्थानों पर बोरिंग हो चुकी है। दो स्थानों पर काम शेष है। इसके बाद पंप, टैंक और अन्य सिविल कार्य किए जाएंगे। हाई एल्टीट्यूड होने के कारण काम करने में दिक्कतें आ रही हैं। इसके बावजूद कोशिश है कि कार्य जल्द पूरा हो और जवानों को हर मौसम में पेयजल पेयजल आपूर्ति सुचारू की जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्द्र नौटियाल