बौद्धिक सम्पदा के व्यावसायीकरण से भारत बनेगा अनुसंधान व विकास का सिरमौर: डॉ. सिंह

 


हरिद्वार, 30 मार्च (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के भेषज विज्ञान विभाग में आयोजित बौद्धिक सम्पदा अधिकार (आईपीआर) विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला का समापन हो गया। इस अवसर पर भारतीय पेटेंट कार्यालय (आईपीओ) के पूर्व संयुक्त नियंत्रक डॉ. बी. पी. सिंह ने कहा कि बौद्धिक सम्पदा के प्रभावी व्यावसायीकरण से भारत अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी देश बन सकता है।

उन्होंने यह कहा कि वर्ष 2014-15 के बाद भारत में पेटेंट पंजीकरण के प्रति सकारात्मक माहौल बना है। इसके परिणामस्वरूप पेटेंट, डिजाइन, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट पंजीकरण की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो देश के आर्थिक और वैज्ञानिक विकास के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

डॉ. सिंह ने बताया कि किसी आविष्कार, रचनात्मक कृति या तकनीक का पेटेंट कराने से उसके अधिकार सुरक्षित हो जाते हैं और उसके व्यावसायीकरण से आर्थिक लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने भारत के फार्मास्यूटिकल क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत आज विश्व का फार्मेसी हब बन चुका है और दवाओं के निर्माण व निर्यात में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जिससे वैश्विक औषधीय आवश्यकताओं की पूर्ति हो रही है।

उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां की अर्थव्यवस्था शोध और नवाचार पर आधारित है, जिससे वह विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। इस अवसर पर फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री शाखा के प्रभारी डॉ. कपिल कुमार गोयल ने भारत में पेटेंट, उनके प्रकार, डिजाइन, ट्रेडमार्क और कॉपीराइट के पंजीकरण की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि बौद्धिक नवाचार, लेखन और रचनात्मक कार्यों का समय रहते पंजीकरण कराना आवश्यक है, ताकि उनके नैतिक, बौद्धिक और आर्थिक अधिकार सुरक्षित रह सकें। उन्होंने संगीत, प्रकाशन, डिजाइन और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र से जुड़े कई कॉपीराइट उल्लंघन के मामलों का उदाहरण देते हुए बताया कि पंजीकृत अधिकारों ने किस प्रकार बौद्धिक सम्पदा की रक्षा की और उल्लंघन करने वालों को आर्थिक दंड दिलवाया।

कार्यशाला के संयोजक सचिव एवं विभागाध्यक्ष प्रो. सत्येन्द्र कुमार राजपूत ने बताया कि इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देशभर से 200 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों द्वारा 10 व्याख्यान दिए गए।

इस अवसर पर डॉ. विपिन कुमार, डॉ. अश्वनी कुमार, डॉ. बलवंत सिंह रावत, डॉ. दीपक सिंह नेगी, डॉ. पीयूष सिंघल, डॉ. प्रिंस प्रशांत शर्मा, हरेंद्र मलिक, जतिंदर कुमार, रोशन लाल, अनुज त्यागी, आनंद कुमार और संजय सहित कई लोग उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला