बौद्धिक सम्पदा अधिकार दिवस पर राष्ट्रीय कार्यशाला

 


हरिद्वार, 28 मार्च (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के भेषज विज्ञान विभाग में बौद्धिक सम्पदा अधिकार दिवस के अवसर पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से बौद्धिक सम्पदा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को बौद्धिक सम्पदा, उसके संरक्षण, प्रकाशन और उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यशाला में ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से हजारों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर बोलते हुए गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. पंकज मदान ने प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित गतिविधियों तथा बौद्धिक सम्पदा संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शोध को अत्याधुनिक और बहुउपयोगी बनाने में विभिन्न सॉफ्टवेयर टूल्स की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो शोधार्थियों और छात्रों को शोध एवं अनुप्रयोग आधारित शिक्षा की ओर प्रेरित करते हैं।

गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की कम्प्यूटेशनल केमिस्ट एवं शोधार्थी सुश्री अवंतिका अग्रवाल ने शोध छात्रों को शोध से प्राप्त आंकड़ों के अनुप्रयोग, निरीक्षण तथा शोध प्रकाशन में उनकी भूमिका के बारे में विभिन्न सॉफ्टवेयर टूल्स की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के माध्यम से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में कई उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सॉफ्टवेयर टूल्स उपलब्ध हैं, जो विभिन्न भाषाओं में कमांड लेकर त्वरित परिणाम उपलब्ध कराते हैं, जिससे शोध और रचनात्मकता का व्यापक वातावरण तैयार होता है।

चित्कारा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर इन्दरवीर सिंह ने विभिन्न प्रकार के पेटेंट, उनके पंजीकरण तथा आर्थिक उपयोग के बारे में प्रतिभागियों को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में छात्रों को प्रारंभ से ही अपनी बौद्धिक क्षमता को शोध, आविष्कार और उनके पंजीकरण व संरक्षण की दिशा में प्रेरित किया जाना चाहिए, ताकि देश में बौद्धिक सम्पदा के विकास को बढ़ावा मिल सके।

विशेषज्ञ वक्ता के रूप में भारत सरकार के पंजीकृत पेटेंट एवं ट्रेड एजेंट डॉ. राहुल तनेजा ने पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के अंतर, उनके पंजीकरण की प्रक्रिया, विभिन्न चरणों तथा आने वाली चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने छात्रों से अपने जीवन में कम से कम एक पेटेंट या ट्रेडमार्क पंजीकृत कराने का आह्वान किया।

स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. नीलमणि ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बौद्धिक सम्पदा में अनुप्रयोग विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है, जिसके बिना आधुनिक तकनीक की कल्पना संभव नहीं है। मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर से लेकर अत्याधुनिक ऑटोमेटिक मशीनों तक में एआई का उपयोग हो रहा है, जिससे कई घंटे का कार्य कुछ ही मिनटों में पूरा हो रहा है।

उन्होंने बताया कि पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क से जुड़े कार्यों में भी विभिन्न सॉफ्टवेयर टूल्स उपलब्ध हैं, जो शोध एवं नवाचार से प्राप्त आंकड़ों को डिजाइन और पेटेंट में बदलने में सहायक हैं।

इस अवसर पर उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के पेटेंट सूचना केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक हिमांशु गोयल ने यूकोस्ट द्वारा बौद्धिक सम्पदा के क्षेत्र में उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण की जानकारी दी।

कार्यशाला के अध्यक्ष एवं भेषज विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. देवेन्द्र सिंह मलिक ने प्रतिभागियों से विशेषज्ञों द्वारा दिए गए तकनीकी ज्ञान को अपने शोध और शिक्षा में अपनाकर बौद्धिक सम्पदा के संरक्षण और संवर्धन में योगदान देने का आह्वान किया। वहीं भेषज विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. सतेंद्र कुमार राजपूत ने कार्यशाला की रूपरेखा, उद्देश्यों और संभावित लाभों की जानकारी देते हुए आशा व्यक्त की कि प्रतिभागियों को इससे शोध, पेटेंट और डिजाइन की अवधारणाओं को समझने में सहायता मिलेगी।

कार्यक्रम के अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा और कुलसचिव प्रो. सत्यदेव निग्मालन्कार ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस दौरान विभाग के समस्त शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला