प्रेमचंद और गांधी के लेखों ने स्वाधीनता आंदोलन में निभाई अहम भूमिका
नई टिहरी, 09 अक्टूबर (हि.स.)। भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के तत्वावधान और भारतीय ज्ञान परंपरा परिप्रेक्ष्य में एसआरटी परिसर बादशाहीथौल में मुंशी प्रेमचंद और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें वक्ताओं ने हिंदी भाषा को समृद्ध बनने में दोनों के योगदान को अहम बताया।
शुक्रवार को एसआरटी परिसर के हिंदी और शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित संगोष्ठी का प्रभारी निदेशक प्रो. जीडीएस नेगी, प्रो. डीएस कैंतुरा, डॉ. आभा दीक्षित, डॉ. विपुल सुनील ने शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद और राष्ट्रपिता गांधी के लेखों, पत्रों और विचारों ने स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों के बीच जन-जागरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गांधी ने अपने लेखन में हिंदी पत्र पत्रिकाओं के माध्यम से देशवासियों के बीच सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय एकता का संदेश पहुंचाने का काम किया। जेएनयू नई दिल्ली के प्रो. सुधीर प्रताप सिंह, प्रो. हरिमन तिवाड़ी ने प्रेमचंद के हिंदी साहित्य में योगदान व गांधी के हिंदी भाषा के प्रति दृष्टिकोण पर विस्तृत व्याख्यान दिया। डॉ. आशुतोष तिवारी ने कहा कि प्रेमचंद ने अपनी साहित्यिक रचनाओं से सामाजिक विषमता, ग्रामीण जीवन, मानवीय संवेदनाओं और जन सामान्य समस्याओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करते हुए हिंदी साहित्य को नई ऊंचाई प्रदान की है।
डॉ. अर्पणा सिंह ने कहा कि दोनों महान विभूतियों के विचार भारतीय सामाज, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना को समझाने में आज भी प्रासंगिक हैं। इस मौके पर डॉ. रोहित कुमार शर्मा, अखिलेश कुमार, दिल्ली विवि के डॉ. बूटा सिंह, प्रो. ममता राणा, प्रो. शंकर लाल, प्रो. पूरन लाल मीणा, डॉ. अमित कुमार शर्मा, डॉ. विशाल गुलरिया, डॉ. एसके. चतुर्वेदी, डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. आराधना बदानी, डॉ. प्रेम बहादुर, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. देवम, डॉ. मनोज नौटियाल, डॉ. हेमराज, डॉ. नीरज जोशी मौजूद थे।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी