पिंडारी ग्लेशियर क्षेत्र के अध्ययन में जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय आजीविका की चुनौतियां उजागर

 


नैनीताल, 23 अक्टूबर (हि.स.)। 1964 से पिंडारी ग्लेशियर जा रहे एवं अक्टूबर 1972 में नंदा खाट पर प्रथम आरोहण करने का गौरव प्राप्त करने वाले तथा वर्ष 1972 में बलजूरी, वर्ष 1990 में मैकटोली व वर्ष 1994 में ट्रेल्स पास का आरोहण कर चुके नैनीताल निवासी पद्मश्री अनूप साह ने गत दिवस वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जीएस रावत एवं युवा छायाकार आदित्य चौधरी और कुछ स्थानीय टूर गाइडों के साथ उत्तराखंड के बागेश्वर जनपद में स्थित पिंडारी हिमनद तथा सरयू नदी के जलग्रहण क्षेत्र के ऊपरी हिस्सों के समीपवर्ती क्षेत्रों का भ्रमण किया है।

इस भ्रमण एवं अध्ययन करने के बाद दोनों ने उन्होंने एक संयुक्त आलेख के माध्यम से क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा, वन्यजीवों, स्थानीय संस्कृति और आजीविका से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया है, साथ ही क्षेत्र की जैव विविधता के संरक्षण और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता बतायी है।

आलेख के अनुसार, क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन, वनों के क्षरण, औषधीय वनस्पतियों की उपलब्धता में कमी और पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन से जुड़े रोजगार के घटते अवसर चिंता का विषय हैं। वहां स्थानीय लोगों को बंदरों, जंगली सूअरों और अन्य वन्यजीवों से फसलों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, जिससे उनकी कृषि उपज घट रही है। ऐसे में उनके लिये मधुमक्खी पालन, स्थानीय उत्पादों के संवर्धन, प्रकृति शिक्षा और जिम्मेदार पर्यटन के माध्यम से आजीविका के नये अवसर विकसित करने की आवश्यकता है।

लेखकों ने पिंडारी क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के उचित रखरखाव, पर्यावरण के अनुकूल आधारभूत ढांचे और संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्रों की सुरक्षा को आवश्यक बताया है। साथ ही स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और बाजार उपलब्ध कराने तथा प्रकृति संरक्षण के प्रयासों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत रेखांकित की है।

आलेख में कहा गया है कि जैव विविधता और स्थानीय संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन का विकास किया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका भी मजबूत हो सके।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी