पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना जरूरी

 


नई टिहरी, 26 सितंबर (हि.स.)। एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विवि के एसआरटी परिसर बादशाहीथौल में भूगोल विभाग की ओर से विश्व पर्यटन दिवस की पूर्व संध्या पर परिचर्चा कायक्रम किया गया। जिसमें छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने पर्यटन के बदलते स्वरूप, तकनीकी नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और पारिस्थितिकी पर्यटन की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की।

वक्ताओं ने कहा कि पर्यटन को स्थानीय रोजगार-स्वरोजगार से जोड़ने के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी ध्यान देना जरूरी है। डॉ. सना रफ़ी ने कहा कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, रोजगार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

पर्यटन गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इससे स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, खान-पान और अन्य सेवाओं को भी बाजार मिल सकता है। विभागाध्यक्ष डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि बदलते समय में पर्यटन को विकसित करने के लिए तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग जरूरी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीक से पर्यटकों को बेहतर जानकारी और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। लेकिन पर्यटन विकास के दौरान प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

उन्होंने पारिस्थितिकी पर्यटन को बढ़ावा देते हुए प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के साथ पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने पर जोर दिया। इस मौके पर गौरी सकलानी, भावना रिखाड़ी, धीमान मुरारी, गौरव उनियाल, अमिशा सजवाण, अंशुल तिवाड़ी, प्रिया यादव, नैतिक कुमार और सिमरन आदि मौजूद रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी