नैनीताल और कैंची धाम में उमड़ा श्रद्धालुओं-सैलानियों का रेला, 20 किमी तक लगा जाम
नैनीताल, 03 अक्टूबर (हि.स.)। श्राद्ध पक्ष के बीच और गांधी जयंती और लाल बहादुर शास्त्री जयंती के अवसर पर, जब देश के लोगों से अपेक्षा रहती है कि राष्ट्रीय पर्व पर देश के महानायकों को और अपने पूर्वजों को याद करें, पूर्व में ऐसा होता भी था, लेकिन शुक्रवार, 2 अक्टूबर से शुरू हुए लगातार तीन दिन के अवकाश के चलते सरोवरनगरी नैनीताल और जनपद के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कैंची धाम में संभवतया पहली बार सैलानियों और श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा।
सप्ताहांत पर उमड़ी इस भीड़ के कारण नैनीताल-हल्द्वानी और नैनीताल-भवाली मार्गों पर यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही। कैंची धाम के लिए वाहनों की कतारें 15 से 20 किलोमीटर तक पहुंच गईं। कई श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने के लिए पांच किलोमीटर से अधिक की दूरी पैदल तय करनी पड़ी। वहीं, नैनीताल में शुक्रवार रात पर्यटक आधी रात के बाद तक होटल के कमरे और वाहनों के लिए पार्किंग तलाशते भटकते रहे, और आखिर माल रोड के
रिक्शा स्टेंड व प्रतिष्ठानों के आगे सोने को मजबूर
कैंची धाम में शनिवार को स्थिति यह रही कि मंदिर पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को लंबे जाम का सामना करना पड़ा। कैंची धाम सुबह के समय हर ओर से वाहनों व श्रद्धालुओं की भीड़ से चोक हो गया। भवाली और भीमताल की ओर से शटल टैक्सियों का संचालन किया गया, लेकिन इसके बावजूद भवाली से गेठिया तक करीब 10 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। वाहनों की लंबी कतारों के कारण श्रद्धालुओं को शटल वाहनों से उतरकर भी काफी दूरी पैदल तय करनी पड़ी। मंदिर परिसर और दर्शन के लिए पहुंचने वाले मार्गों पर भी अत्यधिक भीड़ रही। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ा।
रातभर कमरे और पार्किंग तलाशते रहे पर्यटक
सरोवरनगरी में शुक्रवार रात पर्यटकों की आमद का दबाव इस कदर रहा कि बड़ी संख्या में लोगों को होटल और पार्किंग की व्यवस्था नहीं मिल पाई। अधिकांश पर्यटक पहले से होटल बुकिंग कराए बिना ही इस उम्मीद में पहुंच गए थे कि दिनभर घूमने के बाद रात में वापस लौट जाएंगे अथवा कहीं ठहरने की व्यवस्था हो जाएगी। लेकिन शुक्रवार देर रात तक पर्यटक होटल और गेस्ट हाउसों में कमरे तलाशते रहे। शहर में कमरों की उपलब्धता सीमित होने के कारण कई पर्यटकों को खुले स्थानों, अपने वाहनों में और दुकानों के आगे रात बिताने को मजबूर होना पड़ा।
रिक्शा स्टैंड, माल रोड पर प्रतिष्ठानों के सामने उपलब्ध खाली स्थानों और बेंचों पर भी कई लोग बैठे अथवा ऊंघते-सोते नजर आए। पार्किंग की तलाश में भी वाहन चालक देर रात तक शहर में भटकते रहे। नैनीझील में भी लंबे समय बाद नौकायन के लिए बड़ी संख्या में नावें सैलानियों को घुमाती नजर आईं।
काठगोदाम से भुजियाघाट और एरीज मोड़ से नैनीताल तक वाहनों की कतारें
शुक्रवार रात नैनीताल-हल्द्वानी मार्ग पर काठगोदाम से भुजियाघाट और डोलमार तक करीब आठ किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा। वहीं, एरीज मोड़ से नैनीताल तक भी वाहनों की कतारें करीब पांच किलोमीटर तक पहुंच गईं। यही स्थित कालाढुंगी रोड पर नैनीताल से खुर्पाताल के बीच भी रही। यातायात की धीमी गति के कारण हल्द्वानी से नैनीताल की लगभग 39 किलोमीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को सामान्य दिनों में इस दूरी को तय करने में लगने वाले समय की तुलना में यात्रियों को कई गुना अधिक-तीन से छह घंटे तक का समय खर्च करना पड़ा।
शनिवार को नैनीताल-भवाली मार्ग पर भी यातायात का दबाव बना रहा। कैंची धाम की ओर जाने वाले वाहनों के साथ नैनीताल और आसपास के पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने से मार्ग पर यातायात बाधित होता रहा। नैनीताल-हल्द्वानी और नैनीताल-भवाली राष्ट्रीय राजमार्गों पर जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढों ने भी वाहनों की गति धीमी की और जाम की समस्या को बढ़ाया।
स्थानीय लोगों और जरूरी सेवाओं को भी हुई परेशानी
जाम का असर केवल पर्यटकों और कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहा। पहाड़ से अपने नियमित और जरूरी कार्यों के लिए हल्द्वानी आने वाले स्थानीय लोगों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी। कई यात्रियों को अपनी सामान्य यात्रा में दोगुना तक समय खर्च करना पड़ा। जाम में एंबुलेंस जैसे आपातकालीन वाहनों के लिए भी रास्ता बनाना मुश्किल होता नजर आया। इससे यातायात दबाव के बीच स्थानीय जरूरतों और आपातकालीन सेवाओं के संचालन की चुनौती भी सामने आई।
कैंची धाम बाइपास पर यातायात शुरू न होने से उठे सवाल
कैंची धाम में लगातार बढ़ते यातायात दबाव के बीच बाइपास का मुद्दा भी चर्चा में रहा। उल्लेखनीय है कि जून माह में प्रशासन की ओर से कैंची धाम बाइपास का निर्माण पूरा होने के दावे किए गए थे, लेकिन अक्टूबर माह तक भी इस मार्ग पर यातायात शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में कैंची धाम की ओर जाने वाले वाहनों का दबाव पुराने मार्ग पर ही बना हुआ है। सप्ताहांत और विशेष अवकाश के दौरान श्रद्धालुओं की भारी संख्या के बीच बाइपास पर यातायात शुरू न हो पाना जाम की समस्या के प्रमुख संदर्भों में सामने आया।
कमरों और टैक्सियों के किराये में भी भारी बढ़ोतरी के दावे
भीड़ और वाहनों की कमी का असर टैक्सी और होटल कारोबार पर भी दिखाई दिया। पर्यटकों के अनुसार, टैक्सियों का किराया सामान्य दरों से तीन गुना तक बढ़ गया, जबकि होटलों के कमरों की दरें चार गुना तक वसूले जाने की बात सामने आई। कुछ सैलानियों ने दावा किया कि सामान्य दिनों में करीब दो हजार रुपये में मिलने वाला कमरा छह से आठ हजार रुपये तक में दिया गया। हालांकि, ये दरें पर्यटकों की ओर से किए गए दावों पर आधारित हैं।
श्राद्ध पक्ष में भी उमड़ी भीड़
इस बार श्राद्ध पक्ष के दौरान नैनीताल और कैंची धाम में उमड़ी भीड़ को भी असामान्य माना जा रहा है। परंपरागत रूप से इस अवधि में लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान और प्रार्थनाएं करते हैं तथाघूमने-फिरने और विशेषकर मंदिरों में दर्शन करने से परहेज भी करते हैं। इसके बावजूद इस सप्ताहांत नैनीताल और कैंची धाम में बड़ी संख्या में पर्यटकों और श्रद्धालुओं का पहुंचना चर्चा का विषय रहा।
भीड़ बढ़ने के पीछे लगातार तीन दिन का अवकाश एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। इसके अलावा बीते सप्ताहों में बारिश, भूस्खलन और पहाड़ी मार्गों पर संभावित बाधाओं के चलते पर्यटकों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम रहने के बाद मानसून की विदाई के साथ पर्यटकों के पहाड़ों की ओर रुख करने को भी इस भीड़ की वजह माना जा रहा है। फिलहाल, इस सप्ताहांत की भीड़ ने नैनीताल और कैंची धाम में पर्यटन एवं धार्मिक यात्राओं के साथ यातायात, पार्किंग, आवास और आपातकालीन सेवाओं के प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों को फिर सामने ला दिया है। आगे सरकार, शासन-प्रशासन इन स्थितियों से क्या सबक लेता है, देखने वाली बात होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी