नाबार्ड के ग्रामीण विकास व कृषि वित्त में प्रगति की ओर
देहरादून, 12 जुलाई (हि.स.)। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने आज श उत्तराखंड क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून में 45वां स्थापना दिवस मनाएगा। ग्रामीण वित्तीय संस्थानों के माध्यम से जमीनी स्तर पर ऋण प्रवाह को सुदृढ़ बनाना विषय पर आधारित इस कार्यक्रम में नाबार्ड की 45 वर्षों की उपलब्धियों व कृषि एवं ग्रामीण विकास को सशक्त बनाने की भावी रणनीतियों पर की जानकारी दी गई।
नाबार्ड के मुख्य प्रबंधक पंकज यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा वित्त वर्ष 2025-26 नाबार्ड उत्तराखंड क्षेत्रीय कार्यालय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का वर्ष रहा। इस अवधि में नाबार्ड ने राज्य में कुल 5,061 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की, जिसमें 5,044 करोड़ ऋण सहायता व 17 करोड़ विकासात्मक पहलों के लिए दिए गए। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है और राज्य में कृषि व ग्रामीण विकास को सुदृढ़ बनाने के प्रति नाबार्ड की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
पुनर्वित्त के क्षेत्र में नाबार्ड ने सहकारी बैंकों तथा उत्तराखंड ग्रामीण बैंक को 4,179 करोड़ की सहायता प्रदान की, जबकि दीर्घकालिक पुनर्वित्त (एलटी रिफाइनेंस) में 53 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। प्रत्यक्ष पुनर्वित्त सहायता (डीआरए) के अंतर्गत 2,004 करोड़ का वितरण किया गया व फसल ऋण व्यवसाय 756 करोड़ के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा।
ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) के अंतर्गत राज्य सरकार को ग्रामीण आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण हेतु 754 करोड़ के ऋण वितरित किए गए, जो निर्धारित लक्ष्य से अधिक रहे। विकासात्मक एवं प्रोत्साहनात्मक पहलों के अंतर्गत नाबार्ड ने स्थानीय उत्पादों, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु-अनुकूल कृषि को बढ़ावा देना जारी रखा। नौ स्थानीय उत्पादों के भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण के लिए सहायता प्रदान की गई तथा मुनस्यारी राजमा के लिए जीआई उपरांत ब्रांडिंग एवं विपणन सहयोग उपलब्ध कराया गया।
चमोली जिले में लूम्स ऑफ नीति-माणा परियोजना के माध्यम से पारंपरिक बुनकरों की आजीविका को सुदृढ़ करने एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का कार्य किया गया, जबकि अल्मोड़ा जिले में कृषि वानिकी आधारित जलवायु-अनुकूल कृषि मॉडल को बढ़ावा दिया गया। दो ट्राइब्स परियोजनाओं के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की 475 बुक्सा परिवारों को लाभान्वित किया गया तथा नैनीताल में चोपड़ा ग्राम विहार मॉडल के माध्यम से ग्रामीण एवं पारिस्थितिकी पर्यटन को प्रोत्साहन मिला।
डिजिटल वित्तीय समावेशन को सशक्त बनाने के लिए नाबार्ड ने ₹324 लाख की सहायता प्रदान की। इसके अंतर्गत 620 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) का कंप्यूटरीकरण, 621 नई बहुउद्देशीय पीएसीएस (एमपीएसीएस) की स्थापना तथा राज्य के सभी क्षेत्रीय सहकारी बैंकों का उन्नत फिनैकल कोर बैंकिंग प्रणाली एवं डोमेन पर सफल माइग्रेशन सुनिश्चित किया गया। पर्वतीय क्षेत्रों में ट्राउट मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास निधि (एफआईडीएफ) व कृषि विपणन एवं सहकारी क्षेत्र को सुदृढ़ करने हेतु क्रेडिट फैसिलिटी फॉर फेडरेशन (सीएफएफ) के अंतर्गत भी सहायता प्रदान की गई।
स्थापना दिवस समारोह में नाबार्ड की 45 वर्षों की विकास यात्रा व उत्तराखंड में कृषि व ग्रामीण विकास में उसके योगदान पर विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट सहकारी संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों तथा महिला उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण विकास, कृषि उद्यमिता, वित्तीय समावेशन तथा सतत ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श भी आयोजित होगा।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल