ड्राइविंग छोड़ी तो टोफू बना रोजगार का सहारा

 

पौड़ी गढ़वाल, 13 सितंबर (हि.स.)। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते ड्राइविंग छोड़ने वाले कोटद्वार के मानपुर निवासी सुशील कुमार भट्ट ने हार नहीं मानी। रोजगार की तलाश में उन्होंने टोफू निर्माण का काम शुरू किया।

पीएमएफएमई योजना से 35 प्रतिशत सब्सिडी और जिला सहकारी बैंक से पांच लाख रुपये का ऋण लेकर करीब एक साल पहले शुरू की गई उनकी इकाई अब स्थानीय बाजार की मांग पूरी कर रही है। साथ ही एक अन्य युवक को भी घर के पास रोजगार मिल गया है।

सुशील बताते हैं कि स्वास्थ्य कारणों से ड्राइविंग छोड़ने के बाद वह स्वरोजगार का विकल्प तलाश रहे थे। इसी दौरान टोफू निर्माण के बारे में जानकारी मिली। दोस्तों के सहयोग से उन्होंने इस काम को शुरू करने का निर्णय लिया। जिला सहकारी बैंक से पांच लाख रुपये का ऋण लेकर मानपुर में इकाई स्थापित की और पीएमएफएमई योजना के तहत 35 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ लिया।

शुरुआती दौर में कारोबार को स्थापित करने में कई चुनौतियां आईं, लेकिन गुणवत्ता पर ध्यान देने और लगातार मेहनत से काम धीरे-धीरे आगे बढ़ा। वर्तमान में आधुनिक मशीनों की मदद से सोयाबीन और मूंगफली के दूध से टोफू तैयार किया जा रहा है। स्थानीय बाजार में मांग बढ़ने से सुशील को प्रतिमाह करीब 15 से 20 हजार रुपये की आय हो रही है।

टोफू इकाई में गौरव बड़थ्वाल भी काम कर रहे हैं। गौरव पहले दुबई के एक होटल में नौकरी करते थे। कोरोना काल के बाद वापस लौटे तो दोबारा विदेश जाने का अवसर नहीं मिल सका। सुशील की इकाई शुरू होने के बाद उन्हें अपने घर के पास ही रोजगार मिल गया।

गौरव का कहना है कि प्रोटीनयुक्त खाद्य उत्पाद होने के कारण टोफू की मांग लगातार बढ़ रही है। स्थानीय स्तर पर इस तरह की छोटी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित हों तो युवाओं को अपने क्षेत्र में ही रोजगार मिल सकता है।

छोटे उद्यमों को प्रोत्साहन दे रही पीएमएफएमई

उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पात्र लाभार्थियों को योजना के प्रावधानों के अनुसार वित्तीय सहायता और अनुदान दिया जाता है। इसके माध्यम से छोटे स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित कर स्वरोजगार के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ाए जा रहे हैं।

योजना के तहत अरसा, रोट, पापड़, चिप्स, गन्ने के जूस, बेकरी समेत विभिन्न खाद्य उत्पादों से जुड़ी इकाइयां स्थापित की जा सकती हैं। सुशील की पहल इसका उदाहरण है कि बैंक ऋण और सरकारी योजना का सहारा लेकर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अवसर को रोजगार में बदला जा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह