डायट में डीएम का एक्शन प्लान, स्मार्ट क्लास से गढ़वाली भाषा को भी दें बढ़ावा

 


पौड़ी गढ़वाल, 05 अगस्त (हि.स.)। जिले की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में बुधवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में बड़ा खाका तैयार किया गया।

कार्यक्रम सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी ने शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा, मॉडल विद्यालय, स्थानीय भाषा, साइबर सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उसका असर सीधे विद्यालयों की कक्षाओं में दिखाई देना चाहिए।

बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, समग्र शिक्षा अभियान, डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास, साइबर सुरक्षा, बाल मेला, आनंदम, कौशलम, अबेकस, बेसिक कंप्यूटर, पायथन, सी++ और सेवारत शिक्षक प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों का नियमित फॉलोअप करने और शिक्षण की नई तकनीकों को स्कूलों में लागू कराने के निर्देश दिए।

स्थानीय भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए जिलाधिकारी ने बस्तारहित दिवस पर गढ़वाली भाषा में शिक्षण कराने के निर्देश दिए। साथ ही डायट द्वारा तैयार गढ़वाली भाषा की पुस्तकों का शीघ्र मुद्रण कर सभी प्राथमिक विद्यालयों तक उपलब्ध कराने को कहा, ताकि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषा और लोक संस्कृति से जुड़ी रहे।

बैठक में नशामुक्ति अभियान के तहत वितरित अनमोल जीवन पुस्तिका की समीक्षा करते हुए विद्यार्थियों में इसके प्रभाव का मूल्यांकन कराने के निर्देश दिए गए। बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए बच्चों के लिए साइबर सुरक्षा और डिजिटल नैतिकता पर सरल पुस्तिका तैयार करने के भी निर्देश दिए गए। विदेशी भाषा पाठ्यक्रमों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने उनकी रोजगारपरक उपयोगिता का आकलन कर नए प्रस्ताव तैयार करने को कहा।

जिलाधिकारी ने जनपद में विकसित किए जा रहे मॉडल विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी डायट को सौंपते हुए कहा कि ये विद्यालय पूरे जिले के लिए आदर्श बनें। वहीं जिन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की सुविधा नहीं है, वहां तत्काल प्रस्ताव तैयार कर डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

बैठक के दौरान निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर मंडी परिषद को जिलाधिकारी के कड़े तेवरों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कार्यदायी संस्था को लंबित आपत्तियों का शीघ्र निस्तारण कर सभी निर्माण कार्य तय समय सीमा में गुणवत्ता के साथ पूरे करने के निर्देश दिए।

बैठक के बाद जिलाधिकारी ने डायट परिसर का निरीक्षण किया। मुख्य भवन में सीलन, महिला शौचालय की बदहाल स्थिति और पेयजल व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने छात्रावास, पुस्तकालय, विज्ञान एवं कंप्यूटर लैब, बायोमेट्रिक व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का निरीक्षण कर प्रशिक्षणार्थियों के लिए बेहतर आवासीय एवं शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

जिलाधिकारी ने कहा कि बदलते समय में शिक्षा को तकनीक, नवाचार, भारतीय ज्ञान परंपरा और स्थानीय आवश्यकताओं से जोड़ना जरूरी है। यदि शिक्षक निरंतर सीखने और नवाचार की भावना के साथ कार्य करेंगे तो जनपद की शिक्षा व्यवस्था नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी और विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य मिलेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह