जयंती पर संतों ने दी आद्य शंकराचार्य को श्रद्धांजलि
हरिद्वार, 21 अप्रैल (हि.स.)। जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य का 1238वां जयंती समारोह मंगलवार काे जगदगुरु आद्य शंकराचार्य स्मारक समिति के महामंत्री श्रीमहंत देवानंद सरस्वती महाराज के संयोजन में शंकराचार्य चौक पर श्री विग्रह पूजन के साथ प्रारंभ हुआ। जिसमें महामंडलेश्वर स्वामी गिरधर गिरी महाराज, भारत माता मंदिर के श्रीमहंत एवं निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी महाराज सहित संत समाज ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके पश्चात श्रीकृष्ण निवास आश्रम में निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती की अध्यक्षता एवं श्रीमहंत देवानंद सरस्वती महाराज के संचालन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर निर्वाण पीठाधीश्वर स्वामी विशोकानंद भारती महाराज ने कहा कि आद्य शंकराचार्य शिव स्वरूप थे। उन्होंने भारत को धार्मिक सांस्कृतिक एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया। सनातन हिंदू धर्म का जो स्वरूप आज दृष्टिगोचर हो रहा है, यह उन्हीं की देन है। महामंडलेश्वर स्वामी गिरधर गिरी महाराज ने कहा कि आदि शंकराचार्य भगवान ने भारत को सनातन हिंदू राष्ट्र बने रहने में जो योगदान दिया तथा विपरीत परिस्थितियों में जिस प्रकार नागा संन्यासियों की सेना गठित कर धर्म की रक्षा की। उसके लिए वे सदैव स्मरण किए जाते रहेंगे।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महानिर्माणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि भगवान आद्य शंकराचार्य भारतीय संस्कृति के प्राण है। 1238 वर्ष पूर्व केरल में जन्म लेकर उत्तर भारत को धार्मिक एकता के सूत्र में पिरोकर जहां उन्होंने सनातन वैदिक हिंदू धर्म को पुनः प्रतिष्ठित किया।श्रद्धांजलि समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, महामंडलेश्वर स्वामी संतोषी माता, महामंडलेश्वर एवं भारत माता मंदिर के श्रीमहंत स्वामी ललितानंद गिरी, महामंडलेश्वर अनंतानंद, महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद, महामंडलेश्वर स्वामी अभ्यानंद, महामंडलेश्वर स्वामी रूपेंद्र प्रकाश सहित संत महंत जनों ने भगवान आद्य शंकराचार्य के चित्र पर पुष्पांजलि कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर महंत रविदेव शास्त्री, महंत दिनेश दास, महंत मोहन सिंह, महंत दुर्गेशानंद सरस्वती, ललितांबा देवी ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी अनिरुद्ध भाटी सहित बड़ी संख्या में संत महंत जन उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला