चुनौतीपूर्ण श्रीकंठ पर्वत का आरोहण कर शिखर पुरुष बने सार्थक
नई टिहरी, 31 अक्टूबर (हि.स.)। टिहरी जिले के सार्थक कुड़ियाल ने 6,137 मीटर ऊंची हिमालय की कठिन चोटियों में शामिल उत्तरकाशी के गंगोत्री वैली के निकट श्रीकंठ पर्वत का सफलता से आरोहण किया है। इस चोटी को फतह करने वाले सार्थक दुनिया के सबसे युवा पर्वतारोही हैं। उनकी सफलता ने टिहरी सहित संपूर्ण उत्तराखंड को गौरवान्वित किया है। सार्थक का लक्ष्य पर्वतों से दोस्ती कर पर्यावरण संरक्षण के साथ साहसिक खेलों के क्षेत्र में भारत का नाम रोशन करना है।
प्रतापनगर ब्लॉक के शुक्री गांव निवासी वरिष्ठ पत्रकार रमेश कुड़ियाल और समाजसेविका सरिता कुड़ियाल के घर जन्मे सार्थक ने नौकरी की बजाए पर्वतारोहरण को वरीयता दी है। महज 25 साल के सार्थक अब इसी क्षेत्र में नाम कमाना चाहते हैं। उनकी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा नई टिहरी के कान्वेंट और केंद्रीय विद्यालय से हुई है। जबकि हायर एजुकेशन देहरादून से हुई है। प्रकृति और पहाड़ों के प्रति उनका आकर्षण पिता रमेश कुड़ियाल की प्रेरणा से लगातार गहराता गया है।
उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) उत्तरकाशी से बेसिक माउंटेनियरिंग कोर्स, सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स तथा एमओआई कोर्स किया। जबकि मनाली स्थित अभिमास ( अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान) से एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स भी किया है। लगातार अभ्यास से उन्होंने पर्वतारोही की तकनीक को सीखा है। जिसके चलते उन्होंने कई बार चुनौतीपूर्ण चोटियों पर सफल आरोहण किया है।
सार्थक बताते हैं कि समुद्र तल से 6,137 मीटर की ऊंचाई पर स्थित श्रीकंठ चोटी को तकनीकी दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यहां तक पहुंचने का रास्ता में न केवल ऊंचाई की चुनौती नहीं, बल्कि पर्वतारोहियों के धैर्य, कौशल और शारीरिक क्षमता और साहस की भी परीक्षा लेता है। कम ऑक्सीजन, खड़ी ढलानें और प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियां ऑपरेशन को दूभर बना देती हैं।
जानकारी के अनुसार अब तक इस चोटी पर केवल चार पर्वतारोहण दल ही सफलतापूर्वक आरोहण कर पाए हैं। ऐसे में सार्थक की सफलता पर्वतारोहण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2022-23 में श्रीकंठ चोटी पर्वतारोहण अभियान के लिए भी सार्थक का चयन हुआ था। जिसके चलते उन्हें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मानित किया।
सार्थक के लिए पर्वतारोहण किसी ऊंची चोटी को फतह करने का रोमांच नहीं बल्कि पहाड़ों को करीब से जानने, प्रकृति के विस्तार को महसूस करने और मानव जीवन व प्रकृति के बीच गहरे संबंध को समझने का माध्यम है। पर्वतारोहण के साथ-साथ उन्होंने जल क्रीड़ा के क्षेत्र में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। सार्थक की सफलता पहाड़ी क्षेत्र के हनुरमंद युवाओं के लिए प्रेरणा का कार्य करेगा। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी सफलता पाने और चुनौतियों से जूझने का उदाहरण पेश किया है।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश रतूड़ी