गढ़वाल विश्वविद्यालय ने लागू की व्यापक अपशिष्ट प्रबंधन नीति

 

श्रीनगर, 07 अक्टूबर (हि.स.)। पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीनगर स्थित हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय ने अपने परिसरों में अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक अपशिष्ट प्रबंधन नीति लागू की है। इस नीति को कुलपति द्वारा अनुमोदित किया गया है।

यह नीति विश्वविद्यालय की पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हिमालयी पर्यावरण की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता और शून्य अपशिष्ट विश्वविद्यालय के विकास की उसकी दृष्टि को दर्शाती है। यह नीति प्रयोगशाला, रासायनिक, जैव-चिकित्सकीय, जैव-रासायनिक और इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट के पृथक्करण, संग्रहण, परिवहन, उपचार और सुरक्षित निस्तारण के लिए एक व्यवस्थित ढांचा प्रदान करती है।

यह नीति श्रीनगर (चौरास), पौड़ी (बी.जी.आर.) और टिहरी (एस.आर.टी.) परिसरों में लागू की जाएगी और यह विद्यार्थियों, संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, कर्मचारियों, प्रयोगशालाओं, छात्रावासों, कैंटीनों, आवासीय क्षेत्रों, संविदाकारों, विक्रेताओं और अन्य हितधारकों पर लागू होगी।

अपशिष्ट प्रबंधन नीति समिति के संयोजक प्रो. टी. सी. उपाध्याय ने कहा कि यह नीति विश्वविद्यालय में व्यवस्थित अपशिष्ट प्रबंधन प्रथाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने नीति के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने तथा स्वच्छ, हरित और अधिक सतत परिसर को बढ़ावा देने के लिए सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक जिम्मेदारी पर ज़ोर दिया।

उन्होंने कहा कि नीति में अपशिष्ट को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जैसे - अजैविक अपशिष्ट, विषाक्त अपशिष्ट, रासायनिक, जैव-चिकित्सकीय, जैव-रासायनिक अपशिष्ट, प्रयोगशाला अपशिष्ट, तथा ई-वेस्ट, जिनके लिए उपयुक्त निस्तारण प्रक्रिया निर्धारित की गई है। यह नीति ‘रिड्यूस, रियूज़ और रिसायकल’ के सिद्धांतों, पर्यावरणीय जागरूकता, सतत प्रयोगशालागत प्रथाओं तथा लागू पर्यावरणीय विनियमों के अनुपालन पर ज़ोर देती है। साथ ही, यह विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट के सुरक्षित एवं वैज्ञानिक निस्तारण को सुनिश्चित करने तथा विश्वविद्यालय के सभी हितधारकों के बीच पर्यावरण के प्रति जागरूक एवं जिम्मेदार परिसर संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष बल देती है।

इससे गढ़वाल विश्वविद्यालय द्वारा एक हरित, सुरक्षित, सतत तथा पर्यावरण के प्रति जागरूक परिसर के निर्माण के प्रयासों को और मजबूती मिलने की अपेक्षा है। प्रो. उपाध्याय ने वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी के विकास और कार्यान्वयन में प्रो. हेमवती नंदन के बहुमूल्य योगदान, मार्गदर्शन और समर्थन के लिए उनका विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने वेस्ट मैनेजमेंट पॉलिसी समिति के सदस्यों डॉ. राम कुमार साहू, डॉ. वरुण बर्थवाल, डॉ. रोहित महर, डॉ. डिगर सिंह, ख्यातिवर्धन जोशी, डॉ. कुलदीप सिंह, डॉ. दिलीप कुमार मीणा एवं डॉ. विक्रम सिंह नेगी के योगदान, सहयोग और सक्रिय सहभागिता की भी सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी डॉ. ए.के. मोहंती एवं कुलसचिव प्रो. रैवानी के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

-------------

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल