उन्नत पदार्थ विज्ञान और शोध में एआई के उपयोग पर वैज्ञानिकों ने दिए व्याख्यान
नैनीताल, 04 अक्टूबर (हि.स.)। कुमाऊं विश्वविद्यालय के हर्मिटेज परिसर में एएनआरएफ-पेयर परियोजना एवं विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला के दूसरे दिन रविवार को देश के जाने-माने वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने उन्नत पदार्थों, नैनो-संरचनाओं तथा शोध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग पर व्याख्यान दिए। कार्यक्रम में शोधार्थियों, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
आज के तकनीकी सत्र का शुभारंभ शिवाजी विश्वविद्यालय के प्रो. किरण कुमार शर्मा के व्याख्यान से हुआ। उन्होंने रासायनिक रूप से अभियांत्रिकीकृत रिड्यूस्ड ग्राफीन आधारित द्वि-आयामी हेटेरोस्ट्रक्चर की जानकारी देते हुए बताया कि रासायनिक विधियों से ग्राफीन की सतह और संरचना में बदलाव कर आवश्यक गुणों वाले पदार्थ तैयार किए जा सकते हैं।
उन्होंने इनके निर्माण, विशेषताओं तथा ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में संभावित उपयोगों पर प्रकाश डाला। विद्यार्थियों के सवालों के जवाब में उन्होंने कंपोजिट और हेटेरोस्ट्रक्चर के बीच अंतर भी समझाया। उन्होंने बताया कि कंपोजिट में विभिन्न पदार्थ मिश्रित रूप में होते हैं, जबकि हेटेरोस्ट्रक्चर में अलग-अलग पदार्थों की परतों को व्यवस्थित रूप से जोड़ा जाता है।
बंगलुरू विश्वविद्यालय के प्रो. बसवराज अंगड़ी ने इलेक्ट्रो-ऑप्टिक अनुप्रयोगों के लिए मेटल ऑक्साइड आधारित नैनोकार्बन क्वांटम डॉट्स पर व्याख्यान दिया। उन्होंने इनके निर्माण, विशेष गुणों तथा इलेक्ट्रॉनिक एवं ऑप्टिकल उपकरणों में संभावित उपयोगों की जानकारी दी। भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलुरू के प्रो. अशोक रायचूर ने अभियांत्रिकीकृत पॉलीइलेक्ट्रोलाइट नैनो-संरचित बहुपरतीय फिल्मों की डिजाइन और अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि अलग-अलग आवेश वाले पॉलीइलेक्ट्रोलाइट्स की परतों को क्रमबद्ध रूप से जोड़कर नैनो स्तर पर विशेष गुणों वाली फिल्में तैयार की जा सकती हैं।
भारतीय विज्ञान संस्थान के प्रो. अभिक चौधरी ने शोध एवं शिक्षण में एआई की भूमिका पर विचार साझा किए। उन्होंने साहित्य समीक्षा, डेटा विश्लेषण और शोध लेखन में एआई के उपयोग की संभावनाएं बताने के साथ ही इसके जिम्मेदार, पारदर्शी और नैतिक उपयोग पर जोर दिया।
कार्यक्रम में पोस्टर प्रस्तुति सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न विभागों के शोधार्थियों नीलम शर्मा, कुणाल जोशी, मानवी बत्रा और ज्योति जमनाल ने नैनोमटेरियल्स, उन्नत पदार्थों और उनके उभरते अनुप्रयोगों से संबंधित शोध प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने चित्रों और आरेखों के माध्यम से जटिल वैज्ञानिक विषयों को सरल ढंग से समझाने का प्रयास किया। विशेषज्ञों और शिक्षकों ने पोस्टरों का अवलोकन कर शोधार्थियों से संवाद किया तथा उन्हें उपयोगी सुझाव दिए।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट ने विशेषज्ञों के साथ डॉ. नंद गोपाल साहू को जन्मदिन पर पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं दीं। सेमिनार में शामिल विशेषज्ञों को शॉल ओढ़ाकर, उत्तराखंड की टोपी पहनाकर, उनका रेखाचित्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया।
सेमिनार में डॉ. नंद गोपाल साहू, डॉ. गीता तिवारी, डॉ. महेश चंद्र आर्य, डॉ. पेनी जोशी, डॉ. संतोष उपाध्याय, डॉ. दीपशिखा जोशी, डॉ. गिरीश चंद्र खरकवाल, डॉ. आंचल अनेजा, डॉ. महेंद्र राणा, प्रो. ललित तिवारी, डॉ. ललित मोहन, डॉ. प्रभात पंत, डॉ. पूनम सहित नीलम, प्रियंका तिवारी, लता, शीतल, भावना, मनीषा जोशी, आयशा और कुणाल सहित अनेक शोधार्थी उपस्थित रहे। आयोजकों के अनुसार, सेमिनार के आगामी दिनों में उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण सहित अन्य तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी