उत्तराखंड को 5वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग तेज
नई टिहरी, 19 जून (हि.स.)। उत्तराखंड एकता मंच ने उत्तराखंड को 5 वीं अनुसूची में शामिल करने की मांग दोहराई। मंच का कहना है कि पहाड़ी प्रदेश उत्तराखंड की मूल समस्याओं के समाधान के लिए गढ़वाली व कुमांऊनी क्षेत्र को पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत लाकर इसे जनजाति क्षेत्र घोषित करना होगा। जिससे उत्तराखंड के लोगों को पेशा एक्ट और एफआरए-2006 एक्ट का लाभ मिलेगा। भूमि की खरीद-फरोख्त रूकेगी। पलायन थमेगा। ग्राम सभाओं के मजबूत होने से स्थानीय लोगों के हक-हकूक भी मजबूत होंगे।
आज उत्तराखंड मूल निवासी संसद के तहत प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता करते हुए मंच के अनूप बिष्ट, प्रवेश जोशी कहा कि 12 हिमालयी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मूल निवासियों को जनजाति का दर्जा प्राप्त है। 5 वीं और 6 वीं अनुसूची से संवैधानिक सुरक्षा कवच प्राप्त हैं। लेकिन उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के मूल निवासियों को इन संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। जनजाति न होने का खामियाजा यहां के लोगों पलायन, जमीनों के खुर्द-बुर्द, बेरोजगार सहित कई समस्याओं के रूप में देखना पड़ रहा है। जनजाति का दर्जा मिलने पर लोग अपने प्रमाण पत्र बनाने को गांवों में आएंगे। जिससे रिवर्स पलायन होगा।
जनजाति क्षेत्र घोषित होने से मूलभूत समस्याओं में रोजगार के अवसर, सख्त भू-कानून, सांस्कृतिक व भाषाई संरक्षण, भूमिहीन किसानों को अधिकार, शक्तिशाली ग्राम सभा, जंगली जानवरों से बचाव जैसी स्थिति बनेगी। कहा कि जनजागरण के लिए कुमांऊ के बाद पूरे गढ़वाल क्षेत्र में भ्रमण किया जा रहा है। इस मौके पर अनिल उप्रेती, कुलदीप पंवार, जगजीत सिंह नेगी, उम्मेद सिंह नेगी, त्रिलोक चंद रमोल, अंकित सजवाण आदि मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल