आठ जनपदों में आपदा से निपटने की तैयारियों का परीक्षण
देहरादून, 18 मार्च (हि.स.)। उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशन एक निकट पर्यवेक्षण में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का दूसरा चरण बुधवार को सम्पन्न हो गया। दूसरे दिन राज्य के शेष आठ जनपदों-हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर, चमोली, चम्पावत, टिहरी, पिथौरागढ़ तथा अल्मोड़ा में बहु-स्थलीय मॉक अभ्यास आयोजित कर आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों को परखा गया।
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से सभी माॅक ड्रिल के सभी चरणों की निरंतर निगरानी की गई। इस दौरान विभिन्न संभावित आपदा परिदृश्यों, जैसे बाढ़, भूस्खलन, भूकम्प, औद्योगिक दुर्घटना, वनाग्नि, सड़क दुर्घटना, मानव-वन्यजीव संघर्ष एवं भगदड़ पर आधारित अभ्यास कर विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया एवं संसाधनों के उपयोग का परीक्षण किया गया।
आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास के सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि राज्य में आयोजित दोनों दिनों के मॉक अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं। इन अभ्यासों के माध्यम से विभिन्न जनपदों में आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों का व्यापक परीक्षण किया गया, जिसमें सभी विभागों एवं एजेंसियों के बीच अच्छा समन्वय देखने को मिला। त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों की उपलब्धता तथा जमीनी स्तर पर कार्य करने की क्षमता संतोषजनक रही है।
मॉक अभ्यासों के दौरान जो भी कमियां एवं चुनौतियां सामने आई हैं, उन्हें गंभीरता से लेते हुए उनका विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इन कमियों को शीघ्र दूर करने हेतु आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, ताकि भविष्य में किसी भी वास्तविक आपदा की स्थिति में और अधिक प्रभावी, त्वरित एवं समन्वित तरीके से कार्य किया जा सके।
जनपद हरिद्वार-बाढ़ एवं भगदड़ जैसे जटिल परिदृश्यों पर केंद्रित अभ्यास,
जनपद ऊधमसिंह नगर-औद्योगिक एवं बाढ़ परिदृश्यों पर विशेष फोकस रहा, जनपद ऊधमसिंहनगर में किच्छा, गदरपुर, खटीमा, काशीपुर एवं पंतनगर क्षेत्रों में मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। बाढ़, नहर तटबंध क्षति, मानव-वन्यजीव संघर्ष तथा औद्योगिक इकाइयों में संभावित दुर्घटनाओं के परिदृश्यों पर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।
जनपद चमोली-भूकम्प, भूस्खलन एवं सुरंग दुर्घटना पर अभ्यास, जनपद पिथौरागढ़ में भूकम्प, भूस्खलन, मार्ग अवरोध, वनाग्नि एवं रासायनिक दुर्घटनाओं पर केंद्रित अभ्यास, जनपद पिथौरागढ़ में मॉक अभ्यास के दौरान विभिन्न आपदा परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए बहु-स्थलीय अभ्यास आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत भूकम्प, भूस्खलन, राष्ट्रीय राजमार्ग अवरोध (रोड ब्लॉक), वनाग्नि तथा केमिकल गैस रिसाव जैसी घटनाओं पर आधारित राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल