ओयूओ हल्द्वानी में उद्योग–शिक्षा सहयोग को सशक्त बनाने में उद्योगों की भूमिका पर मंथन
हल्द्वानी , 06 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय के उद्योग–अकादमिक प्रकोष्ठ द्वारा उद्योग–शिक्षा सहयोग को सुदृढ़ बनाने में उद्योगों की भूमिका विषय पर एक विचार-विमर्श का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य उद्योग जगत एवं उच्च शिक्षा संस्थानों के मध्य प्रभावी समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख, कौशल-आधारित एवं उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में सार्थक संवाद स्थापित करना था।
विश्वविद्यालय के निदेशक (अकादमिक) प्रो. पी. डी. पंत ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि उद्योग जगत के साथ सतत संवाद एवं सहयोग से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकती है।
उद्योगों की सक्रिय भागीदारी से विद्यार्थियों में व्यावसायिक दक्षता, नेतृत्व क्षमता एवं नवाचार की भावना विकसित होगी, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकेंगे।
प्रो. मंजरी अग्रवाल, संयोजक, उद्योग–अकादमिक प्रकोष्ठ द्वारा कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए, उद्योग–अकादमिक प्रकोष्ठ के उद्देश्यों, भावी कार्ययोजना तथा विश्वविद्यालय द्वारा उद्योग–शिक्षा सहयोग को सुदृढ़ बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नीरज शारदा, शारदा एलएलपी, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, हल्द्वानी रहे। व्याख्यान में उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी एवं तकनीकी युग में उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच सतत संवाद एवं सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों का विकास, कौशल-आधारित प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, लाइव प्रोजेक्ट, वित्तीय एवं व्यावसायिक साक्षरता तथा व्यावहारिक अनुभव पर विशेष बल देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग–अकादमिक सहयोग केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता, स्टार्टअप संस्कृति तथा समस्या-समाधान आधारित शिक्षण को भी प्रोत्साहित करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी जी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उद्योग एवं शिक्षण संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहन देने तथा उद्योग की अपेक्षाओं के अनुरूप पाठ्यक्रमों के विकास पर बल देते हुए कहा कि उद्योग–अकादमिक सहयोग विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि उद्योग एवं विश्वविद्यालयों के बीच सतत सहयोग से विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी तथा उत्तराखण्ड में कौशल विकास, नवाचार एवं उद्यमिता को नई दिशा मिलेगी।
विचार-विमर्श के दौरान प्रतिभागियों ने उद्योग–अकादमिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए नियमित संवाद, विशेषज्ञ व्याख्यान, औद्योगिक भ्रमण, संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएँ, कौशल विकास कार्यक्रम, इंटर्नशिप एवं विभिन्न उद्योगों के साथ समझौता ज्ञापनों को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण कार्यो के लिए उद्योग–अकादमिक प्रकोष्ठ की सरहना की गई।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों एवं विभिन्न संकायों के प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए उद्योगों की अपेक्षाओं और उच्च शिक्षा की वर्तमान आवश्यकताओं पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का सफल संचालन सोमेश पाठक ने किया। अंत में डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए मुख्य वक्ता, अध्यक्ष, सभी प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया। इस दौरान प्रोफेसर पी.डी.पंत, प्रोफेसर अशुतोष भट्ट, डॉ. सुमित प्रसाद, डॉ. कृष्ण कुमार टम्टा, डॉ. प्रिया महाजन, डॉ. ललित पंत, डॉ. कुशा सिंह आदि उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / अनुपम गुप्ता