पुलिस-प्रशासन के कथित राजनीतिक इस्तेमाल पर यशपाल आर्य ने जताई चिंता
देहरादून, 10 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने प्रदेश में पुलिस और प्रशासन के कथित राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर हाल में हुई घटना के कारणों और उसके बाद की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सोमवार को जारी बयान में आर्य ने कहा कि उत्तराखंड आंदोलन से अस्तित्व में आए राज्य की जनता अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रतिकार के महत्व को अच्छी तरह समझती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रशासनिक कार्रवाई से जनभावनाएं प्रभावित होती हैं, तो संबंधित अधिकारियों को अपनी कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि किसी शांतिपूर्ण रैली में शामिल लोगों को पहले से ही ‘असामाजिक तत्व’ मानकर उन्हें रोकने या रैली को विफल करने के लिए प्रशासनिक शक्ति का इस्तेमाल किया गया, तो इस पूरे मामले की भी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाएं और प्रशासनिक व्यवस्था स्थायी होती हैं।
आर्य ने अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों से ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968 के नियम 3 और 5 का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी निष्पक्षता, राजनीतिक तटस्थता और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता है।
उन्होंने कहा कि आचरण नियम अधिकारियों से सत्यनिष्ठा, कर्तव्य के प्रति समर्पण और सेवा की गरिमा के अनुरूप आचरण की अपेक्षा करते हैं। वहीं, नियम 5 अधिकारियों को राजनीतिक गतिविधियों और राजनीतिक दलों से दूरी बनाए रखने से संबंधित है।
आर्य ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक अधिकारियों का आचरण किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता के तौर पर दिखाई नहीं देना चाहिए। अधिकारियों की निष्पक्षता केवल होनी ही नहीं, बल्कि जनता को दिखाई भी देनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कथित राजनीतिक बयानों, उपचुनावों में प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल तथा जिला पंचायत चुनावों में प्रशासन और पुलिस की भूमिका को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के हित में किया गया है, तो यह केवल किसी एक घटना का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय है।
आर्य ने कहा कि कांग्रेस ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ खड़ी है और उनके संवैधानिक अधिकारों तथा स्वतंत्र कार्यप्रणाली की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी अधिकारी के खिलाफ नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से निष्पक्ष और संविधान के प्रति जवाबदेह प्रशासन के पक्ष में है।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय