वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन पर नए शासनादेश से नाराजगी

 

नैनीताल, 19 जनवरी (हि.स.)। उत्तराखंड शासन के वित्त (पेंशन) अनुभाग द्वारा 16 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश के बाद लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के नियमित व वर्कचार्ज कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त हो गया है। शासनादेश में वर्कचार्ज कर्मचारियों की पेंशन पात्रता को लेकर नए प्रावधान लागू किए गए हैं, जिनके तहत एक बड़े वर्ग को पुरानी पेंशन योजना से बाहर किए जाने की बात कही गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

शासनादेश के अनुसार 1 अक्टूबर 2005 से पूर्व विनियमित वर्कचार्ज कार्मिकों को ही पुरानी पेंशन का लाभ मिलेगा, जबकि इसके बाद विनियमित या कार्यरत कर्मचारियों को नई पेंशन प्रणाली अथवा एकीकृत पेंशन योजना के अंतर्गत लाया जाएगा। इसके साथ ही कई मामलों में पूर्व में जोड़ी गई वर्कचार्ज सेवा को निरस्त करते हुए पेंशन का पुनरीक्षण करने और भविष्य में केवल न्यूनतम आवश्यक सेवा अवधि ही जोड़ने का निर्णय लिया गया है। हालांकि शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूर्व में अतिरिक्त रूप से भुगतान की गई पेंशन राशि की वसूली नहीं की जाएगी।

इस शासनादेश पर उत्तराखंड नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ लोक निर्माण विभाग नैनीताल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ का कहना है कि इस आदेश के बाद वर्ष 1980 से 2025 के बीच कार्यरत और सेवानिवृत्त हुए हजारों कर्मचारी पेंशन के दायरे से बाहर हो गए हैं। कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके मृतक आश्रितों को आज तक न तो नियमित किया गया और न ही पेंशन व अन्य देयकों का भुगतान हुआ, जिससे वे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

संघ से जुड़े पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारी विरोधी रवैया अपना रही है और माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों की अवहेलना की गई है। उनका कहना है कि कर्मचारियों को जो भी अधिकार और लाभ मिले, वे न्यायालयों के हस्तक्षेप से मिले, सरकार की ओर से नहीं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि लोक निर्माण विभाग में सैकड़ों रिक्त पद होने के बावजूद वर्कचार्ज और दैनिक कर्मचारियों को नियमित नहीं किया गया और सरकारी भूमि व आवासों पर अतिक्रमण के मामलों में भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ नैनीताल ने इस शासनादेश को कर्मचारी विरोधी करार देते हुए 19 जनवरी 2026 को नैनीताल के गांधी चौक पर शासनादेश की होली जलाने का निर्णय लिया है। संघ ने प्रदेश भर के कर्मचारियों से एकजुट होकर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया है। संघ के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि यह शासनादेश वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार पर होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी