चकराता में तीन दिवसीय वनाग्नि संरक्षण प्रशिक्षण शुरू

 


देहरादून, 4 फरवरी (हि.स.)। उत्तराखंड में वनाग्नि संरक्षण को लेकर तीन दिवसीय बहुविभागीय समन्वय प्रशिक्षण बुधवार को चकराता वन प्रभाग में शुरू हो गया। उद्घाटन सत्र में मुख्य वन संरक्षक (वनाग्नि) सुशांत पट्टनायक ने वनाग्नि को राज्य के लिए गंभीर पर्यावरणीय और आपदा प्रबंधन चुनौती बताया और विभिन्न विभागों के बीच संगठित और त्वरित समन्वय पर जोर दिया।

यह प्रशिक्षण केंद्रीय राज्य वन सेवा अकादमी (कैसफोस) के सहयोग आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ),अग्निशमन सेवा,राजस्व विभाग और वन विभाग के कुल 30 अधिकारी एवं कर्मचारी प्रतिभाग कर रहे हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य वनाग्नि जैसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय, साझा समझ और संयुक्त कार्यप्रणाली विकसित करना है। प्रतिभागियों को उत्तराखंड के वन प्रकार,वनाग्नि की वर्तमान स्थिति, वनाग्नि के प्रकार एवं ईंधन,रोकथाम और न्यूनीकरण तकनीकें,अग्नि सुरक्षा उपाय,आधुनिक अग्निशमन उपकरणों का प्रदर्शन और फायर लाइन निर्माण एवं नियंत्रण उपायों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण और मैदानी भ्रमण कराया जा रहा है।

चकराता वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी वैभव कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम विभिन्न विभागों के बीच मैदानी स्तर पर समन्वय को सुदृढ़ करते हैं और वन संरक्षण और जनसुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय