उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भारी बारिश और आकाशीय बिजली की चेतावनी
देहरादून, 13 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड में रविवार को मौसम का मिजाज बदलने की संभावना है। मौसम विभाग ने राज्य के पर्वतीय जिलों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने तथा तीव्र से अति तीव्र वर्षा होने का अनुमान जताया है।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और देहरादून में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा अथवा गर्जन के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। राज्य के अन्य जिलों में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और गरज के साथ बौछार होने की संभावना है।
विभाग ने विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के तीव्र दौर के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी है। आकाशीय बिजली और तेज बारिश की संभावना को देखते हुए संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में आवाजाही के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। बीते 24 घंटों में राज्य के मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहा, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में यह सामान्य से सामान्य से अधिक दर्ज किया गया।
इस दौरान पिथौरागढ़ के बंगापानी में सर्वाधिक 53 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। लोहर्केत में 39, लैंसडाउन में 25, पिथौरागढ़ में 23.6, काठगोदाम में 22.8, लोहाघाट में 16.6, मुक्तेश्वर में 13, चमोली में 12.4, धारचूला में 11.6 और कपकोट में 10 मिलीमीटर बारिश हुई।
देहरादून में आंशिक से सामान्यतः बादल छाए रहने और कुछ क्षेत्रों में बहुत हल्की से हल्की वर्षा अथवा गर्जन के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। यहां अधिकतम तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।
उत्तराखंड में रविवार सुबह आठ बजे तक अधिकांश प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहा। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार धारचूला में काली नदी का जलस्तर 888.60 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर 889 मीटर के करीब है। यहां जलस्तर बढ़ने का रुझान है और पिछले 24 घंटे में 11.60 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
अलकनंदा, भागीरथी, मंदाकिनी और गंगा नदियों के विभिन्न निगरानी स्थलों पर भी जलस्तर खतरे के निशान से नीचे रहा। ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर 338.70 मीटर और हरिद्वार में 291.40 मीटर दर्ज किया गया।
हरिद्वार के भीमगोड़ा बैराज से 81,135 क्यूसेक तथा ऋषिकेश के वीरभद्र बैराज से 60,246.88 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। बाढ़ पूर्वानुमान के लिए श्रीनगर, ऋषिकेश, हरिद्वार और रामनगर को प्रमुख स्थल के रूप में निगरानी में रखा गया है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय