मतदाता सूची से नाम हटाने की संदिग्ध आपत्तियों की उच्चस्तरीय जांच हो : यशपाल आर्य

 


देहरादून, 04 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में फॉर्म-7 के माध्यम से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए दायर की गई संदिग्ध आपत्तियां लोकतंत्र पर सुनियोजित हमला है। मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

यशपाल आर्य ने मंगलवार को जारी बयान में कहा कि तीन अगस्त के फॉर्म-10 के ऑनलाइन अवलोकन में केवल बाजपुर विधानसभा के भाग संख्या 27, 142 और 149 में ही 93 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि इसी प्रकार की शिकायतें प्रदेश की अन्य विधानसभा क्षेत्रों से भी सामने आ रही हैं, जिससे प्रथम दृष्टया किसी संगठित गिरोह या सुनियोजित नेटवर्क की साजिश प्रतीत होती है।

उन्होंने कहा कि यदि फर्जी आपत्तियों के आधार पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों पर सीधा हमला है। उन्होंने राज्य सरकार से इस पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए कहा कि मतदाता के संवैधानिक अधिकारों से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।

नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर प्रदेश के सभी मतदाता रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि फर्जी एवं दुर्भावनापूर्ण तरीके से फॉर्म-7 दाखिल करने वाले व्यक्तियों या गिरोहों की पहचान कर उनके विरुद्ध निर्वाचन कानूनों और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने यह भी मांग की कि तीन अगस्त के फॉर्म-10 में दर्ज सभी आपत्तिकर्ताओं को नियमानुसार फॉर्म-13 तथा जिन मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए हैं, उन्हें फॉर्म-14 के तहत अनिवार्य नोटिस जारी कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी सुनवाई सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस प्रदेशव्यापी जनआंदोलन शुरू करेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय