विरासत महोत्सव का आगाज, पंडित साजन मिश्रा के शास्त्रीय गायन ने बांधा समां

 






-छोलिया नृत्य से मंच पर दिखी उत्तराखंड की लोकसंस्कृति की झलक

देहरादून, 23 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा के संगम के साथ शुक्रवार को देहरादून में विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल-2026 का शुभारंभ हुआ। हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में आयोजित महोत्सव का उद्घाटन मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने दीप प्रज्वलित कर किया। महोत्सव की पहली सांस्कृतिक संध्या में कुमाऊं के पारंपरिक छोलिया नृत्य और बनारस घराने के प्रख्यात शास्त्रीय गायक पद्म भूषण पंडित साजन मिश्रा की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही।

रिच (रूरल एंटरप्राइजेज फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज) संस्था की ओर से आयोजित इस महोत्सव में लोककलाओं, शास्त्रीय संगीत और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान किया गया। उद्घाटन के अवसर पर संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष आरके सिंह, संयुक्त सचिव विजय श्रीजोशी और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी समीर सिन्हा भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत चंदन बोहरा के नेतृत्व में छोलिया नृत्य दल की प्रस्तुति से हुई। कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा, तलवारों और युद्ध संगीत की संगति में छोलिया नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को उत्तराखंड की लोकपरंपरा से रूबरू कराया। इस प्रस्तुति में जगमोहन आगरी, कृष्ण आर्य, गोधन राम, रमेश राम, देव राम, गोपाल सिंह, पुरव बोरा, दीवान राम, हरीश राम, खीम राम, दयाल राम, नंदन राम, महेश राम, भुवन कुमार, गंगा धामी, मीनू सुपियाल, तनुजा पाठक और गिरीश कुमार सहित अन्य कलाकार शामिल रहे।

छोलिया उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र की पारंपरिक लोकनृत्य शैली है, जिसका संबंध विवाह समारोहों और योद्धा परंपराओं से रहा है। तलवारों के साथ सामूहिक रूप से किया जाने वाला यह नृत्य अब विभिन्न सांस्कृतिक और मांगलिक अवसरों पर भी प्रस्तुत किया जाता है। महोत्सव में कलाकारों ने इस लोकनृत्य के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को प्रदर्शित किया।

सांस्कृतिक संध्या का प्रमुख आकर्षण पंडित साजन मिश्रा और उनके पुत्र स्वरांश मिश्रा का शास्त्रीय गायन रहा। बनारस घराने की गायकी के लिए प्रसिद्ध पंडित साजन मिश्रा ने अपने पुत्र के साथ प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भारतीय शास्त्रीय संगीत की बारीकियों से परिचित कराया। उनके साथ तबले पर अभिषेक मिश्रा और हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्रा ने संगत की।

प्रस्तुति की शुरुआत राग आधारित गायन से हुई। गायन, तबले और हारमोनियम के बीच तालमेल ने कार्यक्रम में विशेष रंग भरा। पिता-पुत्र की जोड़ी ने सुरों के माध्यम से बनारस की शास्त्रीय संगीत परंपरा की झलक प्रस्तुत की। कलाकारों की प्रस्तुति के दौरान श्रोता संगीत की लय और सुरों से जुड़े रहे।

पंडित साजन मिश्रा भारतीय शास्त्रीय संगीत की ख्याल गायकी के प्रतिष्ठित कलाकारों में शामिल हैं। उन्हें वर्ष 2007 में पद्म भूषण, 1998 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और वर्ष 2011-12 के लिए राष्ट्रीय तानसेन सम्मान से सम्मानित किया गया था। अपने भाई पंडित राजन मिश्रा के निधन के बाद वह अपने पुत्र स्वरांश मिश्रा के साथ संगीत प्रस्तुतियां दे रहे हैं।

स्वरांश मिश्रा बनारस घराने की संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। वह अपने पिता के साथ देश-विदेश में प्रस्तुतियां देते रहे हैं। महोत्सव में उनकी भागीदारी ने शास्त्रीय संगीत की परंपरा और नई पीढ़ी के बीच निरंतरता को रेखांकित किया।

महोत्सव परिसर में लगाए गए स्टॉल भी आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र रहे। यहां पारंपरिक वस्त्रों, परिधानों, मखमली शॉल और हस्तशिल्प से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी के साथ खाद्य परिसर में विभिन्न व्यंजनों का लोगों ने स्वाद लिया। आयोजकों के अनुसार, महोत्सव का उद्देश्य कला, संगीत, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक परंपराओं को एक साझा मंच उपलब्ध कराना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय