‘वंदे मातरम्-150 वर्ष’ के रंगों में सजी लोक एवं जनजातीय कला, पांच कलाकार पुरस्कृत

 


देहरादून, 28 अगस्त (हि.स.)। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी), प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय ‘वंदे मातरम्-150 वर्ष’ लोक एवं जनजातीय कला कार्यशाला, प्रदर्शनी एवं चित्रकला प्रतियोगिता का शुक्रवार को समापन हुआ। करीब 50 कलाकारों ने इसमें भाग लेकर भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की विविध शैलियों को प्रदर्शित किया।

समापन समारोह की मुख्य अतिथि पद्मश्री लोक गायिका डॉ. माधुरी बड़थ्वाल ने कहा कि चित्रकला केवल एक विधा नहीं, बल्कि कला-साधना है। लोक कला लोगों को प्रकृति और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि कला से संवेदनशीलता, सकारात्मक सोच और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।

विशिष्ट अतिथि रंगकर्मी डॉ. राकेश भट्ट ने कहा कि लोक भाषा, लोक संगीत और लोक कला समाज की आत्मा हैं। इनके संरक्षण के लिए युवाओं को आगे आना होगा। युवा पीढ़ी अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति को समझे और उसे आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाए, तभी लोक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकेगा।

ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी की कुलसचिव डॉ.छाबड़ा ने कहा कि एनसीजेडसीसी के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम ने विद्यार्थियों, कला प्रेमियों और आमजन को भारतीय लोक एवं जनजातीय कला की विविधता को करीब से समझने का अवसर दिया।

आयोजन समन्वयक डॉ.कृष्ण कुमार ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य लोक एवं जनजातीय कला परंपराओं के संरक्षण के साथ युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना था। विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने अपनी कला शैलियों में चित्र और अन्य कलाकृतियां तैयार कीं तथा एक-दूसरे की कला परंपराओं और तकनीकों को समझने का अवसर पाया।

चित्रकला प्रतियोगिता में भारतीय सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति, लोकजीवन, मातृभूमि और भारतीय जीवन मूल्यों से जुड़े विषयों को कलाकारों ने अपनी रचनाओं में उकेरा। प्रतियोगिता में विशाखा गुंज्याल, मानवी सलाथिया, मीरा चौहान, आरुषि सेमवाल और हर्षदीप कौर को श्रेष्ठ पांच कलाकार चुना गया। प्रत्येक विजेता को 25-25 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। प्रत्येक प्रतिभागी कलाकार को एनसीजेडसीसी की ओर से 2,100 रुपये की सम्मान राशि भी दी जा रही है।

डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि कार्यक्रम एनसीजेडसीसी, प्रयागराज के निदेशक सुदेश शर्मा के निर्देशन में आयोजित हुआ। विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. आलोक तीर्थ भौमिक और नीलम जयाला और निर्णायक मंडल में डॉ. अंजलि थापा और डॉ. शशि झा शामिल रहे।

नोडल अधिकारी डॉ.मंदाकिनी शर्मा ने कहा कि आयोजन पारंपरिक कला विधाओं के संरक्षण और युवा कलाकारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट्स विभाग के अध्यक्ष प्रो. आनंद कर्मकार सहित शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी और कला प्रेमी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय