आत्मा और परमात्मा के बीच महात्मा का होना अनिवार्य: प्रो. सुधीर

 


हरिद्वार, 10 जुलाई (हि.स.)। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में आयोजित सप्ताहभर के आर्यवीर दल एवं आर्या वीरांगना प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन वैदिक जीवन मूल्यों, आत्मिक उन्नति और शारीरिक प्रशिक्षण पर आधारित विभिन्न सत्र आयोजित किए गए।

प्रो. सुधीर आर्य ने कहा कि आत्मा और परमात्मा के बीच एक महात्मा का होना अनिवार्य है। दैनिक जीवन में यज्ञ का समावेश आत्मिक उन्नति का प्रभावी साधन है। उन्होंने वैदिक पुरोहित तैयार करने के लिए यज्ञ विद्या सीखने पर बल देते हुए कहा कि इससे युवाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने के अवसर भी विकसित होते हैं।

शिविर के यज्ञ सत्र का संचालन डॉ. भारत वेदालंकार एवं आर्य विदुषी डॉ. दीपिका के नेतृत्व में हुआ। प्रतिभागियों को यज्ञ की वैज्ञानिक एवं सार्वभौमिक उपयोगिता तथा पर्यावरण, जीव-जंतुओं और वनस्पतियों पर इसके सकारात्मक प्रभावों की जानकारी दी गई।

बौद्धिक सत्र में बृहस्पति आर्य ने संयमित दिनचर्या को स्वस्थ जीवन का आधार बताते हुए कहा कि अनुशासित जीवनशैली अनेक बीमारियों से बचाव के साथ अनावश्यक चिकित्सा व्यय को भी कम करती है।

शारीरिक प्रमुख सुनील कुमार ने प्रतिभागियों को अनुशासन और नेतृत्व के गुणों का प्रशिक्षण दिया। वहीं आर्या वीरांगनाओं का प्रशिक्षण कोमल, राखी, पूजा, डॉ. शालिनी और डॉ. बिंदु मलिक के निर्देशन में संपन्न हुआ।

शिविर में 200 से अधिक वीर-वीरांगनाएं भाग ले रही हैं। इनमें आर्य शिक्षण संस्थाओं के विद्यार्थियों के साथ गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय के बीए, बीपीएड, बीटेक, बीफार्मा, एमए तथा शोधार्थी भी शामिल हैं।

कार्यक्रम में डॉ. गगन माटा, डॉ. कपिल मिश्रा, डॉ. कल्पना सागर, डॉ. सुनीता रानी, डॉ. विपिन शर्मा, डॉ. आशीष धमान्दा, डॉ. मुकेश त्यागी, डॉ. अमन कुमार, डॉ. शिवकुमार चौहान सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला