उत्तराखंड को बारहमासी पर्यटन गंतव्य बनाने पर जोर, साहसिक गतिविधियों का जिलावार कैलेंडर बनेगा
देहरादून, 06 अक्टूबर (हि.स.)। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने उत्तराखंड को बारहमासी पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने के लिए पर्यटन गतिविधियों को वर्षभर संचालित करने और प्रत्येक जिले की विशेष भौगोलिक एवं प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप नए पर्यटन उत्पाद विकसित करने पर जोर दिया है। उन्होंने पर्यटन विभाग को साहसिक पर्यटन गतिविधियों का जिलावार वार्षिक कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
राज्यपाल ने मंगलवार को लोक भवन में पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल से प्रदेश में वर्ष 2026 के दौरान संचालित पर्यटन गतिविधियों, चारधाम यात्रा तथा शीतकालीन एवं साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली।
पर्यटन सचिव ने राज्यपाल को बताया कि वर्ष 2026 में अब तक 56 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों और साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में प्रस्तावित एवं संचालित गतिविधियों की भी जानकारी दी।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक और प्राकृतिक विविधता को देखते हुए पर्यटन को केवल धार्मिक स्थलों और यात्रा तक सीमित रखने के बजाय वर्षभर चलने वाली गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए। पर्वतीय जिलों में स्थानीय परिस्थितियों, प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन क्षमता के अनुरूप नए पर्यटन उत्पाद विकसित किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि जिलावार वार्षिक कैलेंडर में ट्रैकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग, साइक्लिंग, मोटर स्पोर्ट्स सहित अन्य साहसिक गतिविधियों को शामिल किया जा सकता है। इससे देश-विदेश के पर्यटकों को पूरे वर्ष उत्तराखंड आने के लिए आकर्षित करने के साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
राज्यपाल ने शीतकालीन पर्यटन को राज्य की पर्यटन अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने सर्दियों में होने वाली प्राकृतिक और साहसिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर प्रचारित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने हिम तेंदुआ साइटिंग, हिमालयन कार रैली और अल्ट्रा मैराथन जैसे आयोजनों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि शीतकालीन पर्यटन के लिए केवल प्रचार-प्रसार पर्याप्त नहीं है। पर्यटकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए स्थानीय स्तर पर सुविधाओं, कनेक्टिविटी, सुरक्षा, प्रशिक्षित मानव संसाधन और होमस्टे जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा।
राज्यपाल ने पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटन से होने वाली आय का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए और युवाओं को अपने गांव तथा क्षेत्र में ही रोजगार के अवसर मिलने चाहिए। इसके लिए स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प और लोक परंपराओं को पर्यटन से जोड़े जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने पर्यटन विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए उत्तराखंड को बारहमासी पर्यटन गंतव्य बनाने की दिशा में योजनाबद्ध और नवाचार आधारित कार्य करने पर जोर दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय