हरिद्वार में युवती ने अपनाया सनातन धर्म, वैदिक विधि से हुआ संस्कार
हरिद्वार, 25 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड की युवती तमन्ना ने इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म स्वीकार किया है। हरिद्वार में शनिवार को वैदिक विधि-विधान,हवन और शुद्धिकरण संस्कार के साथ उनकी घर वापसी कराई गई। सनातन धर्म स्वीकार करने के बाद उनका नया नाम नेहा रखा गया।
संत आश्रम महा परिषद के अध्यक्ष रामविलास दास महाराज के मार्गदर्शन में पंडित जितेंद्र ज्योति ने वैदिक संस्कार कर्म संपन्न कराया। इस अवसर पर हिंदू रक्षा दल के जिला अध्यक्ष विशाल चौहान की भी प्रमुख भूमिका रही।
जानकारी के अनुसार, तमन्ना ने अपनी इच्छा से सनातन धर्म अपनाने का निर्णय लिया। इसके बाद हरिद्वार के चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड पर धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद के महामंत्री रामविशाल दास महाराज, अखाड़ा परिषद के पूर्व प्रवक्ता बाबा हठयोगी और प्रबोधानंद गिरी महाराज सहित कई संत उपस्थित रहे।
संतों की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-यज्ञ संपन्न हुआ और सनातन धर्म की परंपराओं एवं रीति-रिवाजों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर नवदीक्षित नेहा का स्वागत किया।
घर वापसी के बाद नेहा ने कहा कि वह अब सनातन परंपराओं के अनुसार जीवन व्यतीत करेंगी। बाबा हठयोगी ने बताया कि तमन्ना ने स्वयं सनातन धर्म अपनाने की इच्छा व्यक्त की थी। उन्होंने कहा कि कुछ अन्य लोग भी धर्म परिवर्तन कर सनातन परंपरा अपनाने की इच्छा जता चुके हैं।
संत रामविशाल दास ने कहा कि धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा और सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक वयस्क नागरिक को अपनी धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है।
इस अवसर पर अखिल भारतीय संत आश्रम परिषद के संरक्षक बाबा हठयोगी महाराज, दिल्ली आर्य समाज के मुकेश शास्त्री, विश्व हिंदू परिषद के विभाग संगठन मंत्री अर्जुन, पानब देव आश्रम के महंत ओमदास महाराज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
बताया गया कि तमन्ना पिछले तीन महीने से हरिद्वार में रह रही थीं। पढ़ाई के दौरान वह स्थानीय धार्मिक कार्यक्रमों और गतिविधियों से जुड़ीं, जहां से वह सनातन संस्कृति से प्रभावित हुईं और अपनी इच्छा से सनातन धर्म अपनाने का निर्णय लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला