तप और सेवा है कांवड़ यात्रा, इसे आदर्श मेला बनाएं : अवधेशानंद
हरिद्वार, 26 जुलाई (हि.स.)। जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने कांवड़ियों से अपील की है कि वे इस बार कांवड़ मेले को आदर्श कांवड़ मेला बनाने में अपना सहयोग दें।
स्वामी जी ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल जल लाने की परंपरा नहीं, बल्कि यह तप, संयम, सेवा और श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने कांवड़ियों से यात्रा के दौरान अनुशासन, शांति और स्वच्छता बनाए रखने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा शिव भक्त रास्तों पर गंदगी न फैलाएं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए स्वामी जी ने कहा कि प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग किया जाए और मां गंगा को स्वच्छ रखा जाए। कांवड़ियों से धर्म के साथ-साथ देश और समाज के प्रति दायित्व निभाने की अपील करते हुए स्वामी अवधेशानंद ने कहा कि कांवड़ियों को आपसी भाईचारा, बुजुर्गों और महिलाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा यदि प्रत्येक कांवड़िया थोड़ा सा संयम और सहयोग दिखाए तो हरिद्वार का कांवड़ मेला देश-दुनिया के लिए मिसाल बन सकता है।
उन्होंने प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं और आमजन से भी मेले को सफल बनाने में सहयोग करने की अपील की।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला