शंकराचार्य चौक हटाए जाने से संत समाज और अखाड़ों में रोष

 


हरिद्वार, 25 जुलाई (हि.स.)। डाम कोठी के निकट स्थित आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य चौक को हटाए जाने के प्रस्ताव से संत समाज और अखाड़ों में गहरा रोष व्याप्त है। हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण द्वारा चौक का व्यवस्थिकरण किया जा रहा है। इसके चलते प्राधिकरण ने चौक मैं स्थापित शंकराचार्य की मूर्ति को सड़क किनारे लगाने की योजना बनाई है।

प्राधिकरण का तर्क है कि वर्तमान स्थान पर यातायात में बाधा और दुर्घटना की संभावना बनी रहती है, इसलिए चौक को स्थानांतरित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि इसके लिए संतों की एक समिति से विचार-विमर्श कर सहमति ली गई है। जिस स्थान पर मूर्ति स्थापित की जानी है वहां पहले से सुलभ शौचालय बना हुआ है। प्राधिकरण उसी शौचालय को तोड़कर वहां मूर्ति लगाने की योजना बना रहा है। यह विवाद की मुख्य वजह है।

जूना अखाड़े के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत महेश पुरी ने कहा कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य दश नाम सन्यास परंपरा के आदि गुरु और सभी के पूज्य हैं। इस चौक पर उनकी प्रतिमा विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कर स्थापित की गई थी, जिसमें सभी अखाड़े और संत समाज शामिल थे। ऐसे में अखाड़ों, धर्माचार्यों और संत संगठनों से बिना वार्ता किए मूर्ति हटाना आपत्तिजनक है।

श्रीमहंत ने कहा कि शौचालय वाली जगह पर शंकराचार्य की मूर्ति स्थापित करना घोर अपमान है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मूर्ति को मूल स्थान पर ही रहने दिया जाए। यदि चौक से यातायात बाधित हो रहा है तो उसकी परिधि कम की जाए या वैकल्पिक मार्ग बनाया जाए, लेकिन आस्था से खिलवाड़ न किया जाए।

संत समाज ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने मनमाने ढंग से निर्णय लिया तो वे आंदोलन को मजबूर होंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला