ऋषिकेश के सुनियोजित विकास को धामी सरकार ने तेज की महायोजना की कवायद
-आवास, पर्यटन, यातायात और पार्किंग व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा, पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर
देहरादून, 30 अगस्त (हि.स.)। धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश के सुनियोजित और सर्वांगीण विकास को लेकर धामी सरकार ने महायोजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आवास विभाग ने महायोजना से जुड़े लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर जोर दिया है।
इसी क्रम में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में देहरादून, पौड़ी गढ़वाल और टिहरी गढ़वाल के संबंधित विकास प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक हुई। बैठक में भवनों की ऊंचाई, सड़क की चौड़ाई, यातायात व्यवस्था, आवासीय एवं व्यावसायिक गतिविधियों समेत महायोजना से जुड़े विभिन्न तकनीकी और नियोजन संबंधी विषयों पर चर्चा की गई।
ऋषिकेश महायोजना का क्षेत्र देहरादून, टिहरी और पौड़ी जिलों से जुड़ा होने के कारण तीनों विकास प्राधिकरणों से प्रस्ताव मांगे गए थे। शासन के निर्देश पर टिहरी और पौड़ी प्राधिकरणों ने अपने बोर्ड से अनुमोदित प्रस्ताव उपलब्ध करा दिए हैं। बैठक में प्राप्त प्रस्तावों और अधिकारियों की टिप्पणियों का परीक्षण किया गया।
सड़क की चौड़ाई और क्षेत्र की आवश्यकता के अनुरूप भवनों की ऊंचाई निर्धारित करने के प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। टिहरी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग की मौजूदगी और विकासात्मक आवश्यकताओं को देखते हुए भवन ऊंचाई को मैदानी क्षेत्रों के मानकों के अनुरूप रखने का अनुरोध किया गया है। वहीं, पौड़ी क्षेत्र के राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से सटे होने के कारण पर्यावरणीय संवेदनशीलता को देखते हुए भवनों की ऊंचाई सीमित रखने के सुझाव को उपयुक्त माना गया।
सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को महायोजना से संबंधित सभी लंबित कार्य प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश जैसे धार्मिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए महायोजना केवल भूमि उपयोग का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के शहरी और आर्थिक विकास की आधारशिला है।
उन्होंने कहा कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक ऋषिकेश पहुंचते हैं। पर्यटन के साथ शहरी आबादी, यातायात दबाव और व्यावसायिक गतिविधियां भी लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ऐसी विकास योजना आवश्यक है, जिससे शहर का विस्तार व्यवस्थित हो और पर्यावरणीय संतुलन भी कायम रहे।
महायोजना में आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के साथ पर्यटन गतिविधियों, यातायात व्यवस्था, पार्किंग, सड़क नेटवर्क और आधारभूत ढांचे के विकास को समग्र रूप से शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य बढ़ते पर्यटन और शहरीकरण के बीच स्थानीय नागरिकों तथा पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाना है।
सचिव आवास ने कहा कि स्थानीय जरूरतों और क्षेत्र की पर्यावरणीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए विकास का संतुलित मॉडल तैयार किया जा रहा है। विशेष रूप से राजाजी राष्ट्रीय उद्यान से लगे क्षेत्रों में निर्माण और विकास गतिविधियों के नियोजन में पर्यावरणीय पहलुओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
डॉ. आर. राजेश कुमार ने संबंधित विभागों और विकास प्राधिकरणों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि तकनीकी अथवा विभागीय स्तर पर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए। महायोजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सरकार की मंशा ऋषिकेश को धार्मिक पर्यटन के साथ आधुनिक, सुविधायुक्त और सुव्यवस्थित पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की है। महायोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में आवासीय, व्यावसायिक, पर्यटन और आधारभूत ढांचे के विकास को स्पष्ट दिशा मिलने की उम्मीद है। सरकार के अनुसार विकास की प्रक्रिया में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ पर्यावरणीय संवेदनशीलता तथा स्थानीय नागरिकों की आवश्यकताओं का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय