मुख्यमंत्री ने दोहराया रक्षाबंधन पर मातृशक्ति के सम्मान और सशक्तिकरण का संकल्प

 


देहरादून, 23 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को देहरादून में आयोजित दो रक्षाबंधन समारोहों में प्रदेश की मातृशक्ति के साथ पर्व मनाया और महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा एवं सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

जीएमएस रोड स्थित चौधरी फार्म और हाथीबड़कला स्थित सर्वे स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में महिलाओं ने मुख्यमंत्री को रक्षा सूत्र बांधा और उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।

मुख्यमंत्री ने बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मातृशक्ति से मिलने वाला स्नेह और विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत है। रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि स्नेह, विश्वास, समर्पण और सुरक्षा के संकल्प का पर्व भी है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में महिलाओं का सम्मान होता है, वही समाज वास्तव में समृद्ध और संस्कारित बनता है।

धामी ने कहा कि महिलाएं आज अंतरिक्ष से लेकर देश की सीमाओं तक, उद्योग, व्यवसाय और अन्य क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं। उत्तराखंड की पहाड़ की महिलाओं ने संघर्ष को अपनी शक्ति बनाकर परिवार, समाज और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और लखपति दीदी अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के केंद्र में मातृशक्ति का सम्मान और कल्याण है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर काम कर रही है। उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, सशक्त बहना उत्सव, मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तिकरण योजना और मुख्यमंत्री उद्यमशाला जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर दिए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में करीब पांच लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं। सात हजार से अधिक ग्राम संगठन और 500 से अधिक क्लस्टर संगठन महिलाओं की सामूहिक शक्ति और नेतृत्व को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।

धामी ने कहा कि सरकारी सेवाओं में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया है। समान नागरिक संहिता के माध्यम से भी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और समान न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी मां के लिए सबसे बड़ी खुशी तब होती है, जब उसका बेटा या बेटी पढ़-लिखकर रोजगार हासिल कर अपने पैरों पर खड़ा होता है। सरकार ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी है।

उन्होंने कहा कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए नकल विरोधी कानून लागू किया गया है और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कठोर व्यवस्थाएं की गई हैं।

धामी ने कहा कि वह रक्षाबंधन समारोह में केवल मुख्यमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक भाई के रूप में अपनी बहनों के बीच आए हैं। उन्होंने मातृशक्ति को भरोसा दिलाया कि प्रदेश की किसी भी बहन या बेटी को परेशानी होने पर वह निःसंकोच अपनी बात मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा सकती है। उनकी समस्या के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा उत्तराखंड बनाने के लिए काम कर रही है, जहां बेटियां सुरक्षित हों, बहनें आत्मनिर्भर हों, माताएं सम्मान के साथ जीवन व्यतीत करें और प्रदेश का युवा अपने भविष्य को लेकर आश्वस्त हो।

मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन पर प्रदेश की महिलाओं को विशेष सौगात देते हुए 28 और 29 अगस्त को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की घोषणा की। इस सुविधा से महिलाएं रक्षाबंधन पर अपने मायके और परिजनों से मिलने के लिए सुगमता से यात्रा कर सकेंगी। राज्य सरकार ने इस सुविधा से होने वाले व्यय की प्रतिपूर्ति उत्तराखंड परिवहन निगम को करने की व्यवस्था की है।

चौधरी फार्म में आयोजित कार्यक्रम में आयोजक जोगिंदर सिंह पुंडीर, उत्तराखंड आपदा प्रबंधन राज्य सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय कुमार रोहिला सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।

सर्वे स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहटकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय