एक प्रदेश में दो कानून, पदोन्नति को तरसे स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
हरिद्वार, 12 अगस्त (हि.स.)। स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का पदोन्नति समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन बुधवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत कर्मचारियों ने काली फीती बांधकर शासन और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पिछले करीब दस वर्षों से उनकी जायज मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जबकि दूसरे विभागों में समान पदों पर पदोन्नति दी जा रही है।
कर्मचारी नेताओं ने इसे “एक प्रदेश में दो कानून” की स्थिति बताते हुए कहा कि पशुपालन विभाग में नियमावली-2019 के तहत वन टाइम सेटलमेंट में 297 पद सृजित कर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कर्मचारियों को पदोन्नति दी जा चुकी है। इसके विपरीत स्वास्थ्य एवं आयुर्वेद विभाग में पद उपलब्ध होने के बावजूद लैब सहायक, डार्क रूम सहायक, ओटी सहायक सहित अन्य पदों पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेड़ा और महामंत्री सुनील अधिकारी ने कहा कि कर्मचारियों की मांगों को लेकर अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ता और समझौते हो चुके हैं, लेकिन अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर विभागीय अव्यवस्थाओं और कर्मचारियों के कथित उत्पीड़न का पूरा मामला उनके सामने रखा जाएगा।
ऋषिकुल-गुरुकुल उपशाखा अध्यक्ष छत्रपाल सिंह, मंत्री ताजबर सिंह, मनीष पंवार और अजय कुमार ने आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर वर्षों से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के साथ अन्याय किया जा रहा है। उनका कहना है कि जब कर्मचारी अपनी समस्याओं को अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं तो उन्हें कथित तौर पर धमकियों का सामना करना पड़ता है।
कोरोना काल में सेवा, अब पदोन्नति में उपेक्षा का आरोप
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान जब अस्पतालों में संक्रमण का सबसे अधिक खतरा था, तब वार्ड बॉय, वार्ड आया और सफाई सेवक सबसे पहले मरीजों की सेवा के लिए वार्डों में पहुंचे थे। कर्मचारियों से ऑक्सीजनरेटर, जनरेटर, ड्रेसर, प्लास्टर सहायक, लैब सहायक, डार्क रूम सहायक, ओटी सहायक और पुस्तकालय सहायक सहित विभिन्न जिम्मेदारियां भी ली जाती हैं, लेकिन पदोन्नति की बारी आने पर उनकी सेवाओं को भुला दिया जाता है।
पौष्टिक आहार और भत्तों में असमानता का मुद्दा भी उठा
कर्मचारियों ने पदोन्नति के साथ पौष्टिक आहार भत्ता, वर्दी भत्ता और धुलाई भत्ता बढ़ाने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि मरीजों के सीधे संपर्क में रहने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी नर्सिंग संवर्ग की तर्ज पर पौष्टिक आहार भत्ता दिया जाना चाहिए।
धुलाई भत्ते में असमानता का आरोप लगाते हुए कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें मात्र 90 रुपये दिए जाते हैं, जबकि अन्य संवर्गों को 500 रुपये तक का भुगतान किया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि 90 रुपये में पूरे महीने के कोट-पैंट और अन्य कपड़ों की धुलाई कराना व्यावहारिक नहीं है।
कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि आंदोलन अब केवल पदोन्नति तक सीमित नहीं रहेगा। स्वास्थ्य और आयुर्वेद विभाग की कथित अव्यवस्थाओं को भी सार्वजनिक मंच पर उठाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र तेश्वर, मंडल अध्यक्ष गढ़वाल राजेंद्र रावत, मंडल अध्यक्ष कुमाऊं भोपाल शाह, जिला अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार, जिला मंत्री राकेश भंवर, प्रदेश संगठन सचिव दिनेश गुसाईं, विपिन नेगी और सुरेंद्र कश्यप समेत बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे।
प्रदर्शन में दिनेश लखेड़ा, सुनील अधिकारी, नवीन नवानी, मूलचंद चौधरी, नाथी राम, ताजबर सिंह, मनीष पंवार, अनिल कुमार, पप्पू, राजू कश्यप, मनीष, लोकेंद्र, त्रिलोकी, अंकित, मोहित, रोहन, राकेश, नीलम, कमलेश, ममता, ईशा, बृजेश, कैलाशो डोली, नितिन, अमित, प्रबल सिंह, ज्योति नेगी, अमित कुमार, सतीश, विनोद और प्रवीण समेत अन्य कर्मचारी शामिल रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला