कर्णप्रयाग में भाजपा की टिकट दौड़ में मनीष खंडूड़ी के नाम की चर्चा, सक्रियता से बढ़े कयास
गोपेश्वर, 12 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच चमोली जिले की कर्णप्रयाग विधानसभा सीट पर भाजपा के संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मौजूदा विधायक अनिल नौटियाल समेत कई स्थानीय नेताओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के पुत्र मनीष खंडूड़ी की क्षेत्र में सक्रियता ने नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दिया है।
मनीष खंडूड़ी की ओर से फिलहाल कर्णप्रयाग से चुनाव लड़ने या भाजपा टिकट की दावेदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। भाजपा की ओर से भी इस संबंध में कोई संकेत नहीं दिया गया है। इसके बावजूद क्षेत्र में उनकी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को संभावित चुनावी तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।
मनीष खंडूड़ी वर्ष 2019 में कांग्रेस के टिकट पर पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी से पराजित होने के बाद वह कांग्रेस में सक्रिय रहे। मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी।
भाजपा में शामिल होने के बाद से वह संगठनात्मक एवं राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं। हाल के दिनों में कर्णप्रयाग क्षेत्र में उनकी सक्रियता ने पार्टी के भीतर और स्थानीय राजनीतिक हलकों में उनके संभावित विधानसभा चुनाव लड़ने को लेकर चर्चा बढ़ाई है।
मनीष खंडूड़ी की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इस चर्चा को महत्वपूर्ण बनाती है। उनके पिता भुवन चंद्र खंडूड़ी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और गढ़वाल से सांसद रह चुके हैं, जबकि उनकी बहन ऋतु खंडूड़ी वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष हैं। ऐसे में खंडूड़ी परिवार की राजनीतिक विरासत को भी संभावित दावेदारी के संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि कर्णप्रयाग में भाजपा के मौजूदा विधायक अनिल नौटियाल समेत कई स्थानीय नेता पहले से राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। ऐसे में यदि मनीष खंडूड़ी भविष्य में टिकट की दावेदारी करते हैं तो पार्टी के भीतर स्थानीय समीकरणों पर इसका असर पड़ सकता है।
फिलहाल भाजपा ने कर्णप्रयाग सीट के लिए किसी उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। इसलिए मनीष खंडूड़ी की संभावित दावेदारी को अभी राजनीतिक कयासों तक ही सीमित माना जा रहा है। आने वाले महीनों में उनकी क्षेत्रीय सक्रियता और संगठनात्मक भूमिका से ही इस चर्चा की दिशा अधिक स्पष्ट होने की संभावना है।
हिन्दुस्थान समाचार / जगदीश पोखरियाल