दिल्ली आंदोलन में शेर सिंह के कथित इस्तीफे पर पुलिस ने उठाए सवाल

 


देहरादून, 24 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली में सीजेपी के आंदोलन के दौरान उत्तराखंड पुलिस के निलंबित सिपाही शेर सिंह द्वारा मंच से दिए गए कथित इस्तीफे को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शेर सिंह पिछले एक वर्ष से अधिक समय से निलंबित हैं और सक्रिय पुलिस सेवा में नहीं हैं। ऐसे में उनके सार्वजनिक रूप से दिए गए कथित इस्तीफे की वैधता और औचित्य पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।

शुक्रवार को जारी पुलिस की ओर से विज्ञप्ति के अनुसार शेर सिंह वर्ष 2025 से एक आपराधिक प्रकरण में आरोपित होने के बाद निलंबित चल रहे हैं। उनके विरुद्ध हरिद्वार के गंगनहर थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र तथा अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

कुमाऊं आईजी निवेदिता कुकरेती ने बताया कि जांच के दौरान कुख्यात गैंगस्टर प्रवीण वाल्मीकि के गिरोह से शेर सिंह की कथित संलिप्तता सामने आई थी। उन पर अन्य आरोपितों के साथ मिलकर लोगों को डराकर भूमि पर अवैध कब्जा कराने और उससे आर्थिक लाभ अर्जित करने में सहयोग करने का आरोप लगाया गया है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मामले में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद शेर सिंह को 15 सितंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया था। बाद में उन्हें 7 नवंबर 2025 को उच्च न्यायालय से जमानत मिली। गिरफ्तारी के बाद विभागीय कार्रवाई के तहत उन्हें निलंबित कर दिया गया था और तब से वे सक्रिय पुलिस सेवा में नहीं हैं।

ऐसे में आंदोलन के मंच से दिए गए कथित इस्तीफे को लेकर यह चर्चा हो रही है कि यह वास्तविक त्यागपत्र है या केवल जनभावनाओं और मीडिया का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय