टीएचडीसी के 5 लाख मुआवजे पर सवाल, श्रमिक परिवारों को मिले न्याय

 

देहरादून, 15 अगस्त (हि.स.)। टीएचडीसी की टीआरटी टनल में हुए हादसे के बाद मृतक श्रमिकों के परिवारों को दी जाने वाली सहायता राशि को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हाट के पूर्व प्रधान राजेंद्र हटवाल ने टीएचडीसी प्रबंधन की ओर से घोषित पांच लाख रुपये की सहायता राशि को अपर्याप्त बताते हुए प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक राहत पैकेज देने की मांग की है।

प्रधान हटवाल ने कहा कि जिन परिवारों ने अपना कमाऊ सदस्य खोया हैए उनके लिए पांच लाख रुपये की सहायता पर्याप्त नहीं है। उन्होंने परियोजना प्रबंधन से सहायता राशि बढ़ाने की मांग की। उन्होंने वर्ष 2021 की रैणी आपदा का उदाहरण देते हुए कहा कि तपोवन विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना में प्रभावित श्रमिक परिवारों को करीब 45 लाख रुपये तक की सहायता दिए जाने की बात सामने आई थी। ऐसे में वर्तमान हादसे में पांच लाख रुपये की सहायता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि जलविद्युत परियोजनाओं से करोड़ों रुपये का कारोबार होता हैए लेकिन परियोजना निर्माण में जान जोखिम में डालकर काम करने वाले श्रमिकों के परिवारों के भविष्य की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

पूर्व प्रधान ने हादसे की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने तथा परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक ऑडिट कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

हटवाल ने मृत श्रमिकों के परिजनों को कम से कम एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने स्थायी रूप से दिव्यांग हुए श्रमिकों को भी एक करोड़ रुपये की सहायताए मृत श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च परियोजना प्रबंधन द्वारा वहन करने और घायलों को कम से कम पांच लाख रुपये की सहायता के साथ निशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की।

उन्होंने कहा कि सवाल केवल पांच लाख रुपये की सहायता का नहींए बल्कि प्रभावित परिवारों के सम्मानए भविष्य और न्याय का है। यदि परिवारों को न्यायपूर्ण राहत नहीं दी गई तो जनांदोलन किया जाएगा। उन्होंने टीएचडीसी प्रबंधन से सहायता राशि के फैसले पर पुनर्विचार कर प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक राहत पैकेज घोषित करने की मांग की।

हिन्दुस्थान समाचार / जगदीश पोखरियाल