गेवरा खदान में विकास, आधुनिक तकनीक और पर्यावरण प्रबंधन से रूबरू हुआ उत्तराखंड का मीडिया दल
कोरबा, 15 सितंबर (हि.स.)। उत्तराखंड के पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की गेवरा ओपनकास्ट कोयला खदान का भ्रमण कर खनन, आधुनिक तकनीक, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की व्यवस्थाओं को देखा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत पीआईबी देहरादून की ओर से आयोजित पांच दिवसीय अध्ययन एवं मीडिया एक्सपोजर टूर (छत्तीसगढ़) के दूसरे दिन प्रतिनिधिमंडल ने खदान में कोयला उत्पादन से लेकर ओवरबर्डन हटाने, कोयले की हैंडलिंग और परिवहन की प्रक्रिया को करीब से देखा। पत्रकारों को उच्च क्षमता वाली मशीनरी, शॉवेल-डंपर संयोजन, सरफेस माइनर, रिपर तकनीक और डिजिटल निगरानी व्यवस्था की जानकारी दी गई।
एसईसीएल के क्षेत्रीय महाप्रबंधक संजय मिश्रा ने कहा कि देश की ऊर्जा जरूरतों और विकास में कोयले की महत्वपूर्ण भूमिका है। कंपनी उत्पादन बढ़ाने के साथ श्रमिकों की सुरक्षा, सामाजिक दायित्व और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दे रही है।
महाप्रबंधक (ऑपरेशंस) धीरज चौधरी ने बताया कि गेवरा एशिया की सबसे बड़ी ओपनकास्ट कोयला खदान है। वर्ष 2023-24 में यहां करीब 5.91 करोड़ टन कोयले का उत्पादन हुआ। खदान से देश के सात राज्यों को कोयले की आपूर्ति होती है और भारत के कुल कोयला उत्पादन में इसका करीब छह प्रतिशत योगदान है। उन्होंने कहा कि एसईसीएल अगले वर्ष दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
प्रतिनिधिमंडल को खनन क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के उपायों की भी जानकारी दी गई। इनमें वनीकरण, मियावाकी पौधरोपण, धूल नियंत्रण, खदान के पानी का प्रबंधन और भूमि पुनर्वास शामिल हैं। मियावाकी तकनीक के तहत करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में 20 हजार पौधे लगाए गए हैं। इनका सर्वाइवल रेट करीब 70 प्रतिशत बताया गया। कम भूमि में सघन वन तैयार करने वाली इस तकनीक को उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य के लिए भी उपयोगी बताया गया।
पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक एवं टूर के संचालन अधिकारी संजीव सुंद्रियाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास, ऊर्जा, सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रबंधन से जुड़े प्रयासों का अध्ययन उत्तराखंड के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
बुधवार को मीडिया प्रतिनिधिमंडल कोरबा में एनटीपीसी और बाल्को का भ्रमण कर ऊर्जा उत्पादन, औद्योगिक गतिविधियों और तकनीकी प्रबंधन की जानकारी लेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय