आयुर्वे पतंजलि अनुसंधान संस्थान व गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के बीच अनुबंध

 


हरिद्वार, 05 जून (हि.स.)। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान को एक मंच पर लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पतंजलि अनुसंधान संस्थान और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। साझेदारी का उद्देश्य आयुर्वेद, जैव-चिकित्सा अनुसंधान, शिक्षा व नवाचार के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है।

इस अवसर पर आचार्य बालकृष्ण ने इंडोनेशिया से अपने संदेश में कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा केवल सांस्कृतिक धरोहर नहीं, बल्कि मानव कल्याण का वैज्ञानिक आधार भी है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और सनातन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप प्रमाणित कर वैश्विक समाज तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का समन्वय समाज और राष्ट्र के लिए स्थायी समाधान विकसित करता है। यह सहयोग युवा वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक अध्ययन तथा वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान की दिशा में प्रेरित करेगा।

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि यह समझौता विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों संस्थानों की संयुक्त विशेषज्ञता से उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, जिसका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचेगा।

पतंजलि अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने बताया कि संस्थान का लक्ष्य आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े ज्ञान को आधुनिक विज्ञान की कसौटी पर स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि संयुक्त शोध परियोजनाएं, शोधार्थी आदान-प्रदान, वैज्ञानिक प्रकाशन और अनुसंधान प्रशिक्षण कार्यक्रम इस सहयोग की प्रमुख विशेषताएं होंगी।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला