48 धान क्रय केंद्रों पर होगी धान खरीद, 8 और प्रस्तावित

 


हरिद्वार, 19 सितंबर (हि.स.)। खरीफ खरीद सत्र 2026-27 में किसानों से धान खरीद की प्रक्रिया को पारदर्शी और किसान हितैषी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) एवं जिला खरीद अधिकारी वैभव गुप्ता की अध्यक्षता में धान खरीद व्यवस्था को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में संबंधित अधिकारियों और क्रय एजेंसियों को समयबद्ध तरीके से सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में सभी तहसीलदारों को ग्रामवार एवं किसानवार सूची समय से उपलब्ध कराने को कहा गया। वहीं सभी क्रय संस्थाओं को निर्धारित समय पर धान क्रय केंद्र स्थापित करने तथा किसानों के लिए पेयजल, छाया, तुलाई सहित अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

मंडी समिति को क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटा, नमी मापक यंत्र, छलना, त्रिपाल सहित आवश्यक सामग्री समय से उपलब्ध कराने को कहा गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि धान खरीद के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो और पूरी प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित की जाए।

17 प्रतिशत नमी समेत गुणवत्ता मानक होंगे स्पष्ट:

अपर जिलाधिकारी ने सभी खरीद एजेंसियों को अपने क्रय केंद्रों पर लगाए जाने वाले बैनरों में भारत सरकार द्वारा निर्धारित धान खरीद मानकों को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। इनमें 17 प्रतिशत नमी सहित अन्य गुणवत्ता मानक शामिल हैं। बैठक में बताया गया कि भारत सरकार की ओर से शुरू किए गए ‘भारत खरीद’ ऐप के माध्यम से किसानों का बायोमैट्रिक पंजीकरण किया जाएगा। इससे धान खरीद प्रक्रिया को और सरल एवं पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

कॉमन धान का एमएसपी 2441 रुपये

बैठक में जानकारी दी गई कि जनपद में किसानों की सुविधा के लिए 48 धान क्रय केंद्र खोले गए हैं, जबकि 8 अतिरिक्त क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं। खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए भारत सरकार ने कॉमन धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का एमएसपी 2,661 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।

बैठक में उप संभागीय विपणन अधिकारी प्रमोद सती, वरिष्ठ विपणन अधिकारी, एनसीसीएफ, यूसीएफ, यूकेयूएसएस, पीसीयू, मंडी समिति तथा विधिक माप विज्ञान विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला