नागदेव मंदिर का तीन दिवसीय वार्षिक पूजन धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न
पौड़ी गढ़वाल, 17 अगस्त (हि.स.)। मंडल मुख्यालय स्थित प्रसिद्ध नागदेव मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक पूजन सोमवार को विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठानों और भंडारे के साथ श्रद्धा एवं धार्मिक उल्लास के बीच संपन्न हो गया। अंतिम दिन सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भक्तों ने नागदेवता के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-शांति, क्षेत्र की खुशहाली एवं समृद्धि की कामना की।
नागदेव मंदिर के वार्षिक पूजन का शुभारंभ शनिवार को पारंपरिक कलश यात्रा के साथ हुआ था। कलश यात्रा के मंदिर पहुंचने के बाद विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान शुरू किए गए। आयोजन के दूसरे दिन रविवार को भी मंदिर परिसर में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ रही। आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग परिवार सहित मंदिर पहुंचे और पूजा-अर्चना में शामिल हुए।
तीन दिवसीय पूजन के दौरान मंदिर परिसर में पूरे समय भक्ति और आस्था का वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने नागदेवता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। धार्मिक अनुष्ठानों में स्थानीय लोगों के साथ आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि नागदेव मंदिर में प्रतिवर्ष होने वाला वार्षिक पूजन क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। इस आयोजन के माध्यम से वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। इस वर्ष भी वार्षिक पूजन को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। समिति की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं।
सोमवार को अंतिम दिन विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होने के बाद मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही तीन दिवसीय वार्षिक पूजन का विधिवत समापन हुआ।
मंदिर समिति ने आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और सहयोगियों का आभार जताया। समिति पदाधिकारियों ने कहा कि धार्मिक आयोजन केवल आस्था का केंद्र नहीं होते, बल्कि इनसे क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराएं जीवंत रहने के साथ ही सामाजिक एकजुटता भी मजबूत होती है।
हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह