फर्जी दस्तावेजों से एमबीबीएस में दाखिले का मामला, दो आरोपित गिरफ्तार

 


देहरादून, 22 सितंबर (हि.स.)। नीट-यूजी 2025 में फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र लगाकर एमबीबीएस में दाखिला मामले में देहरादून पुलिस की एसआईटी ने दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपितों ने तीन अभ्यर्थियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से दाखिला दिलाने के नाम पर प्रत्येक से 45 लाख रुपये लेने की बात तय की थी।

पुलिस के मुताबिक 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेंटाउन थाने में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जाने के संबंध में अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून ने पुलिस अधीक्षक ग्रामीण-1 जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी गठित की थी।

एसआईटी ने जांच के दौरान संबंधित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और शिक्षण संस्थानों से प्राप्त रिकॉर्ड की जांच की। जांच में अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में दर्ज पते गलत पाए गए। संबंधित शिक्षण संस्थानों से प्राप्त दस्तावेजों के परीक्षण के बाद अभ्यर्थियों के वास्तविक पतों की जानकारी सामने आई।

विवेचना में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर एसआईटी ने रूपेश पंडित और अरविंद कुमार को पूछताछ के लिए थाना रायपुर बुलाया। पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस के अनुसार, रूपेश पंडित पिछले करीब पांच वर्षों से एजुकेशन कंसल्टेंसी का काम कर रहा था। वह उत्तर प्रदेश के मेरठ में ‘मिकोडो पाठशाला’ नाम से कंपनी संचालित करता था और निजी विश्वविद्यालयों तथा विदेशों में एमबीबीएस, बीटेक, बीसीए, बीबीए और बीकॉम समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर प्रवेश दिलाने का काम करता था।

जांच में यह भी सामने आया कि अरविंद कुमार रूपेश का परिचित था। उसने अपनी पुत्री सहित तीन अभ्यर्थियों के एमबीबीएस में दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। पुलिस के मुताबिक रूपेश और उसके साथियों ने तीनों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से दाखिला दिलाने के लिए प्रत्येक से 45 लाख रुपये लेने की बात तय की थी। तीनों अभ्यर्थियों के परिजनों से 20-20 लाख रुपये अग्रिम लिए गए थे।

पुलिस का आरोप है कि रूपेश और उसके साथियों ने तीनों अभ्यर्थियों के कूटरचित दस्तावेज तैयार कर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में प्रवेश कराया गया। एसआईटी मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। ---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय