पीसीपीएनडीटी अधिनियम उल्लंघन पर अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक दोषी करार
हरिद्वार, 16 जून (हि.स.)। पीसीपीएनडीटी (पूर्व गर्भाधान एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक) अधिनियम, 1994 के उल्लंघन के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हरिद्वार ने कनखल क्षेत्र स्थित एक अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालक को दोषी ठहराते हुए 10 हजार रुपये के जुर्माने तथा न्यायालय के उठने तक कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दो वर्ष के कारावास का प्रावधान भी किया गया है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा कनखल स्थित मदर केयर क्लीनिक में पीसीपीएनडीटी अधिनियम के तहत जांच के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं। जांच में सामने आया था कि केंद्र बिना वैध पंजीकरण के अल्ट्रासाउंड सेवाओं का संचालन कर रहा था। इसके बाद तत्कालीन अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा न्यायालय में परिवाद दायर किया गया था।
मामले की सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, हरिद्वार ने अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने और निर्धारित नियमों का पालन न करने के लिए केंद्र संचालक को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि जिले में पीसीपीएनडीटी अधिJनियम का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराया जा रहा है तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले एक सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रुड़की क्षेत्र में तीन अल्ट्रासाउंड मशीनों को सील किया है। ये मशीनें उपयोग में नहीं थीं, लेकिन उनके संभावित दुरुपयोग की आशंका को देखते हुए सील करने की कार्रवाई की गई।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि भ्रुण लिंग जांच और अवैध अल्ट्रासाउंड संचालन जैसी गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है तथा कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला