नवरात्रि पर शक्तिपीठों में भक्तों की भीड़
हरिद्वार, 11 अक्टूबर (हि.स.)। शारदीय नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही धर्मनगरी हरिद्वार के प्रमुख सिद्धपीठों और देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। प्राचीन मायादेवी मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। स्थानीय भक्तों के साथ अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में शीश नवाकर सुख-समृद्धि की कामना की।
नवरात्रि पर मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। देवी के जयकारों से धर्मनगरी का वातावरण भक्तिमय बना रहा।
घरों और मंदिरों में घट स्थापना के साथ मां के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा की गई।
मायादेवी मंदिर को माता सती के 52 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। मान्यता है कि यहां माता सती की नाभि गिरी थी। मां मायादेवी को हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मंदिर का इतिहास 11वीं शताब्दी से जुड़ा बताया जाता है और इसका संचालन श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े द्वारा किया जाता है। प्राचीन काल में हरिद्वार को मायापुरी कहा जाता था। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में प्रतिदिन सुबह-शाम आरती होती है।
राजा दक्ष के यज्ञ से जुड़ी मान्यता
मंदिर के मुख्य पुजारी भास्कर पुरी महाराज के अनुसार, इसकी कथा माता सती और भगवान शिव से जुड़ी है। कनखल में राजा दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया। पिता के यज्ञ में पहुंची माता सती पति का अपमान सहन नहीं कर सकीं और योगाग्नि से प्राण त्याग दिए। वियोग में शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर विचरण करने लगे।
पौराणिक कथा के अनुसार सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंडित किया।
जहां-जहां उनके अंग गिरे, वे शक्तिपीठ कहलाए। मायादेवी को भी इसी परंपरा का शक्तिपीठ माना जाता है। मान्यता है कि यहां दर्शन-पूजन से विशेष पुण्य मिलता है और मां मनोकामना पूर्ण करती हैं।
चंडी देवी से दक्षिण काली तक भीड़
नवरात्रि के पहले दिन मायादेवी के साथ ही चंडी देवी, मनसा देवी, दक्षिण काली, शीतला माता, सुरेश्वरी देवी और डाट काली मंदिर सहित अन्य शक्तिपीठों में भी भीड़ रही। भक्तों ने पुष्प, नारियल और प्रसाद अर्पित किया। नवरात्रि में मंदिरों में विशेष पूजा, आरती और देवी के विभिन्न स्वरूपों का श्रृंगार किया जाएगा।
हरिद्वार के देवी मंदिर सदियों से आस्था के केंद्र हैं।
नवरात्रि में बढ़ी चहल-पहल से धार्मिक वातावरण और जीवंत हो गया है। गंगा स्नान के साथ शक्तिपीठों के दर्शन को पहुंचे श्रद्धालुओं से उत्साह का माहौल है।
नवरात्र शुरू होते ही बाजारों में भी रौनक लौट आई। 16 दिन के पितृ पक्ष के बाद बाजार गुलजार दिखे और लोगों ने जमकर खरीदारी की। इस दौरान फूलों और फलों के दामों में उछाल भी देखा गया।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला