राष्ट्रीय लोक अदालत में 9080 मामलों का निस्तारण, करोड़ों रुपये पर हुआ समझौता

 


देहरादून, 09 मई (हि.स.)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकृति के कुल 9080 मामलों का निस्तारण आपसी समझौते के आधार पर किया गया। लोक अदालत का आयोजन राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला मुख्यालय देहरादून सहित बाह्य न्यायालयों में किया गया।

देहरादून जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं वरिष्ठ सिविल जज सीमा डुंगराकोटी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालतें त्वरित, सरल और सुलभ न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि लोक अदालतों के माध्यम से आपसी सहमति, सौहार्द और संवाद की भावना को बढ़ावा मिलता है, जिससे समाज में शांति और सामंजस्य स्थापित होता है।

जिला मुख्यालय देहरादून, ऋषिकेश, विकासनगर, डोईवाला, मसूरी और चकराता न्यायालयों में आयोजित लोक अदालत में फौजदारी, चेक बाउंस, धन वसूली, मोटर दुर्घटना क्लेम, पारिवारिक विवाद, उपभोक्ता फोरम और अन्य सिविल मामलों सहित कुल 5844 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में 13 करोड़ 36 लाख 35 हजार 816 रुपये की धनराशि पर समझौता हुआ।

लोक अदालत में फौजदारी के शमनीय प्रकृति के 251 मामले, चेक बाउंस के 515, धन वसूली के 17, मोटर दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल के 14, पारिवारिक विवाद के 105, पब्लिक यूटिलिटी सर्विस के 26 तथा मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े 4835 मामलों का निस्तारण किया गया। इसके अलावा उपभोक्ता फोरम के 12, आर्बिट्रेशन के 9 और अन्य समझौतायोग्य मामलों का भी समाधान किया गया।

बाह्य न्यायालय विकासनगर में 978 मामलों का निस्तारण कर 22 लाख 67 हजार 653 रुपये की धनराशि पर समझौता हुआ, जबकि ऋषिकेश में 537 मामलों में 2 करोड़ 31 लाख 40 हजार 51 रुपये, डोईवाला में 242 मामलों में 22 लाख 80 हजार रुपये की धनराशि पर समझौता हुआ। लोक अदालत में पारित निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होते हैं और मामलों के निस्तारण के बाद पक्षकारों को जमा न्याय शुल्क भी वापस किया जाता है। इसके अलावा विभिन्न बैंकों और संस्थानों के प्री-लिटिगेशन स्तर के 3236 मामलों का भी निस्तारण किया गया, जिनमें 2 करोड़ 18 लाख 40 हजार 185 रुपये की धनराशि पर समझौता हुआ। मसूरी में 56 मामलों में 47 लाख 55 हजार 492 रुपये की धनराशि पर समझौता हुआ।-----------------

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय